वाराणसी। चार दिन बाद प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने की तैयारी कर रहे वाराणसी के सांसद नरेंद्र मोदी ने पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की आलोचना करते हुए कहा कि देश आजाद होने के बाद सबसे पहले गुजरात के क्रांतिकारी श्याम कृष्ण वर्मा की अस्थियां उनकी इच्छा के अनुरूप आजाद में भारत लानी थीं। उनके देहावसान के 73 साल बाद जेनेवा गया और उनकी अस्थियों को लेकर आया ताकि उनकी आत्मा को शांति मिल सके। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम दो तरह के लोग चला रहे थे। एक क्रांतिकारी और दूसरे सत्याग्रही। श्याम कृष्ण वर्मा भगत सिंह, वीर सावकरकर की तरह सशस्त्र क्रांति के पुरोधा थे। उन्होंने लोकमान्य तिलक को लंदन पढ़ने के लिए भेजा था। उनका निधन 1930 में विदेश में हो गया। तब उन्होंने वसीयत की थी कि उनकी अस्थियां आजादी मिलने के बाद भारत ले जाई जाएं। देश आजाद होने के बाद कितनी सरकारें आई और गईं किसी ने उनकी सुध नहीं ली।
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मुंह पर ताला था, मांगने का मौका नहीं मिला
वाराणसी। जो बिन मांगे परोसे उसे मां कहते हैं। नरेंद्र मोदी ने प्राचीन दशाश्वमेध घाट की मढ़ी से अपनी बात की शुरुआत इन्हीं शब्दों की। उसके बाद बेनियाबाग की रैली पर प्रतिबंध का जिक्र किए बगैर उन्होंने कहा कि बनारस की जनता से मुझे मांगने सौभाग्य नहीं मिला। मेरे मुंह पर ताला लगा था। मुझे अपने मतदाताओं से बात करने पर रोक लगा दी गई थी। मैंने आपसे मौन संवाद किया और आपने मेरे मौन पर भी मुहर लगा दी। नामांकन करने के बाद आया भी तो बड़ी मुश्किल से अपने कार्यालय तक पहुंच पाया। मैं इस पावन धरती और यहां बसे सभी मतदाताओं को नमन करता हूं।
अब गठबंधन से विपक्ष बनेगा
वाराणसी। नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह युग परिवर्तन का संधिकाल है। अब तक देश का नेतृत्व ऐसे लोगों के हाथ था जो आजादी के पहले पैदा हुए थे। पहली बार उनके हाथ में देश का नेतृत्व आया है जो आजादी के बाद पैदा हुए। जो स्वतंत्रता से पूर्व पैदा हुए थे, उनके पास देश पर मरने का अवसर था लेकिन हम लोग आजाद हिंदुस्तान में पैदा हुए हैं और हमें देश के लिए जीना है। अब तक गैर कांग्रेसी सरकारें गठबंधन से बनती रही हैं। जनता से पहली बार गैर कांग्रेसी सरकार को पूर्ण बहुमत से सत्ता सौंपी है। हालात तो ऐसे हो गए कि अबकी विपक्ष गठबंधन से बनने जा रहा है।