वाराणसी। मार्निंग कोर्ट के मुद्दे पर पूर्वांचल के बार प्रतिनिधियों ने यूपी बार कौंसिल की भूमिका पर सवाल उठाते हुए नाराजगी जाहिर की। सेंट्रल बार एसोसिएशन के सभागार में बुधवार को हुई बैठक में एक दर्जन जिलों के पदाधिकारी शामिल हुए। बैठक में इस मुद्दे पर बार कौंसिल के दफ्तर का घेराव करने के लिए 23 मई को इलाहाबाद पहुंचने का आह्वान किया गया। तय किया गया वहां बार कौंसिल के जरिए मुख्य न्यायाधीश से मिलकर मामले की गंभीरता को उनके समक्ष रखा जाएगा।
बैठक में शामिल बार कौंसिल के सदस्य अरुण त्रिपाठी, हरिशंकर सिंह व श्रीनाथ त्रिपाठी की सहमति पर यह निर्णय लिया गया कि हड़ताल में शामिल जिलों के बार पदाधिकारी इलाहाबाद दिन में एक बजे तक पहुंचेंगे। वहां बार कौंसिल से मिलकर मुख्य न्यायाधीश से मिलने का समय लिया जाएगा। बैठक में उस समय हंगामा तब खड़ा हो गया जब गाजीपुर के एक प्रतिनिधि ने कहा कि वादकारियों के हित में एक सप्ताह तक काली पट्टी बांधकर काम करें और साथ में आंदोलन को प्रभावी बनाने की रणनीति तय की जाए। इस पर अधिवक्ता विरोध जताने लगे। मामले को शांत कराने के लिए सेंट्रल बार अध्यक्ष ने हस्तक्षेप किया तो अधिवक्ता बैठक का बहिष्कार कर विरोध जताने लगे। वरिष्ठ अधिवक्ताओं के हस्तक्षेप पर मामला शांत हुआ। यह भी निर्णय लिया गया है कि 24 मई तक अधिवक्ता हड़ताल पर रहेंगे। अध्यक्षता सेंट्रल बार अध्यक्ष डा. नीलकंठ तिवारी व संचालन महामंत्री रामाश्रय पटेल ने किया। बैठक में बनारस बार अध्यक्ष संजय वर्मा, महामंत्री सत्येंद्र सिन्हा के अलावा गाजीपुर के प्रतिनिधि धीरेंद्र नाथ सिंह, अशोक ओझा, बलिया के देवेंद्र नाथ मिश्र, अजय पांडेय, जौनपुर के सत्येंद्र बहादुर सिंह, रमेश चंद्र पाल, भदोही के राजाराम शुक्ल, रमेश चंद्र मौर्य, आजमगढ़ के विजय बहादुर सिंह, मिर्जापुर के बिहारी प्रसाद सिंह, कृष्णमोहन त्रिपाठी, चंदौली चंद्रभान सिंह, मऊ के फतेह बहादुर सिंह, मानसिंह यादव आदि शामिल थे।
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सूनी आंखों को हड़ताल खत्म होने का इंजतार
न्यायिक कार्य ठप होने से मायूस होकर लौट रहे वादकारी
तत्काल जमानत वाले मामलों के बंदी जेल में रहने को मजबूर
घनश्याम मिश्र
वाराणसी। ‘वादकारी का हित सर्वोच्च है’ यह ध्येय वाक्य अदालतों में सबसे ऊपर लिखा मिल जाएगा। यहीं नहीं, त्वरित न्याय की परिकल्पना और उसे मूर्त रूप में उतारने के सिद्धांत की भी बातें होती हैं लेकिन हकीकत में वादकारी ही सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहा है। पूर्वांचल के सभी जिलों में मार्निंग कोर्ट के मुद्दे पर 20 दिनों से जारी बेमियादी हड़ताल का सबसे ज्यादा खामियाजा वादकारियों को भोगना पड़ रहा है। न जानें कितनी सूनी आंखें हैं, जिन्हें हड़ताल के खत्म होने का इंतजार है।
जिन छोटे-छोटे मामलों में तत्काल जमानत हो जाती है, हड़ताल के कारण ऐसे तमाम मामलों के बंदी जेल में रहने को बाध्य हैं। किसी की फसल बर्बाद हो रही है तो किसी के घर में दो जून की रोटी का जुुगाड़ न हो पाने से बच्चे भूखे सो रहे हैं। ऐसे गरीब और लाचार बंदियों की फरियाद कौन सुनेगा। यह सवाल कचहरी परिसर में अब उठने लगा है। दूरदराज से अपने सारे काम छोड़कर तपती धूप में न्याय के लिए कचहरी पहुंचने वाले वादकारी सूनी आंखों से वकीलों को देखते हैं और मायूस होकर वापस लौट रहे हैं। हालांकि खुद अधिवक्ता भी असहज स्थिति में हैं कि वह क्या करें। गाजीपुर बार के एक प्रतिनिधि हड़ताल के चलते पूर्वांचल की सभी अदालतों में न्यायिक कार्य ठप हैं। वकील अपनी ही लड़ाई में व्यस्त हैं तो दूसरों को न्याय क्या दिलाएंगे। एक एक पहलू यह भी कि जिला जेलों में क्षमता से अधिक बंदी पहले से ही हैं। वहीं, जमानत न होने से जेल में इनकी संख्या भी बढ़ती जा रही है।