वाराणसी। काशी को विद्युत कटौती मुक्त कराकर विजेता की मुद्रा में लौटे विधायक श्याम देव राय चौधरी दादा के स्वागत में दीवाली जैसा जश्न मनाया गया। सड़कों पर एक तरफ ढोल-नगाड़े बजे तो दूसरी ओर आतिशबाजी से आसमान में सतरंगी छटा बिखरने लगी। उनको बधाई देने के लिए सभी वर्गों के लोग सड़कों पर उमड़ आए।
धरने के सातवें दिन कंपनी बाग के मुख्य द्वार पर दोपहर बाद जब यह खबर आई की मुख्यमंत्री ने दादा की मांग मान ली तो तपन में बेना झलते लोगों के चेहरे पर चमक आ गई। चाय-पान की दुकानों पर सिर्फ दादा की जीवटता और उनके संघर्ष के चर्चे शुरू हो गए। गेट पर शौकत भाई, सुजात अली भी माला लेकर दादा के स्वागत में खड़े थे। हर तरफ स्वागत में खड़े लोग दादा का इंतजार कर रहे थे। धरना स्थल पर ड़ॉ दयाशंकर मिश्र दयालु, साधना वेदांती व अन्य नेता फोन पर बार -बार दादा की लोकेशन ले रहे थे। दादा के आगमन की खबर आते ही ढोल-नगाड़े गूंजने लगे। कुछ देर में ही सड़क जाम हो गई। एक तरफ पटाखे फूटने लगे रात 10.58 पर सीएमओ की नीली बत्ती कार से दादा जब कंपनी बाग के सामने पहुंचे तब उत्साहित समर्थकों के उमड़ने से धक्कामुक्की होने लगी। इसमें छायाकारों भी चोटें आईं। किसी तरह दादा धरना स्थल पर पहुंचे। वहां उन्होंने दशाश्वमेध के पार्षद नरसिंह दास बाबा को जूस पिलाकर उनका अनशन तुड़वाया। कोई दादा के गले में माला डाल रहा था तो कोई मिठाई बांट रहा था। यहां से दादा को जुलूस की शक्ल में बाजे गाजे के साथ गोदौलिया होते हुए घर पहुंचाया गया।
उधर, मैदागिन पर किशन दीक्षित नेतृत्व में सपा कार्यकर्ताओं ने सीएम जिंदाबाद के नारे लगाने शुरू कर दिए। उनका कहना था कि कटौती मुक्ति मुख्यमंत्री ने की है, इसमें भाजपा का कोई श्रेय नहीं है। इस बात पर उनकी भाजपाईयों से कहासुनी की नौबत आ गई।