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तरही नातिया मुशायरे में गूंजे कलाम

Varanasi Updated Fri, 06 Jun 2014 05:31 AM IST
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वाराणसी। शायर मुहम्मद उमर ‘नज्म बनारसी’ की याद में गुरुवार को हुए तरही नातिया मुशायरे में शायरों के कलाम गूंजते रहे। अपने कलामों के जरिए शायर ‘नज्म बनारसी’ को खिराजे अकीदत पेश की गई। शायरों ने दिए गए तीन मिसरों पर बनाए गए अपने कलाम से लोगों को रात तक बांधे रखो।
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तंजीम फिदायाने मुस्तफा कच्ची बाग की ओर से हैंस तले में होने वाले तरही नातिया मुशायरे में कई जिलों के शायर जुटे। मुशायरे की सदारत मौलाना गुलाम नबी और निजामत वाली बनारसी ने किया। मुशायरे में शामिल 30 शायरों ने तीन मिसरों ‘रसूल बरहक में हर कली को चमन में रंगे हिजाब बख्शा’, ‘इशारा कर दे पैगंबर तो निकले फूल पत्थर से’ और ‘गुलदस्त ए नबी से मोअबतर है कायनात’ को अपने कलाम में शामिल कर जब लोगों के सामने उसे पेश किया तो लोग उन्हें दाद देने में नहीं चूके। फज्र की नमाज तक लोग शायरों के कलामों से रूबरू होते रहे।
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