वाराणसी। गंगा के सर्वाधिक चौड़े पाट के किनारे बसी और अपने जलाशयों-कुंडों के लिए मशहूर रही काशी का मौसम साल-दर-साल गरम होता जा रहा है। वजह, तेजी से बढ़ती जनसंख्या के चलते शहरीकरण में हो रहा विस्तार और घटती हरियाली। यह कहना है पिछले 30 साल के बनारस के तापमान की परिवर्तनशीलता पर शोध कर रहे बीएचयू के भूभौतिकी विभाग के प्रो. राजीव भाटला का। शोध में मिले आरंभिक निष्कर्षों के आधार पर वह कहते हैं कि बनारस के तापमान में बढ़ोतरी हो रही है।
प्रो. भाटला के मुताबिक मौसम और जलवायु संबंधी किसी भी प्रकार का शोध करने के लिए जरूरी है कि 30 साल के आंकड़ों का अध्ययन किया जाए। इसलिए उन्होंने 1971 से 2010 तक के वाराणसी के तापमान में होने वाले उतार-चढ़ाव को केंद्र में रखकर अपने विषय पर काम शुरू किया। यह शोध कार्य करीब चार माह से चल रहा है। उन्होंने बताया कि खास तौर पर पिछले दस सालों में अधिकतम तापमान में ज्यादा वृद्धि हुई है। गौर करें तो बीते एक दशक में ही शहर की तस्वीर भी तेजी से बदली है। खेत-खलिहानों में आवासीय कालोनियां विकसित हो रही हैं। जलस्रोत सूखते जा रहे हैं। पौधे लगाने को कौन कहे, शहरीकरण की आंधी में पुराने पेड़ भी काट दिए जा रहे हैं। इसके चलते भी तापमान में बढ़ोतरी हो रही है।
एक और खास बात जो अब तक के अध्ययन में सामने आई है, वह यह कि अप्रैल और मई को गर्मी का महीना माना जाता है। जून में मानसून पूर्व और मानसूनी बारिश होने लगता है। लेकिन पता चला है कि हीट वेव यानी तापलहरी की आवृत्ति अप्रैल और मई की तुलना में जून में अधिक हुई है। फिलहाल शोध जारी है लेकिन प्रो. भाटला निरंतर बढ़ते तापमान को भविष्य के लिए शुभ संकेत नहीं मानते।
हरियाली घटी, बढ़ा कंक्रीट का जंगल
वाराणसी। वातावरण में मौजूद कार्बन डाई ऑक्साइड अवशोषित कर शुद्ध ऑक्सीजन देने वाले हरे पेड़ कटते जा रहे हैं। यह भी तापमान में बढ़ोतरी की अहम वजह है। इसके साथ ही खेत-खलिहानों में विकसित होतीं आवासीय कालोनियों के रूप में विस्तार लेता चला जा रहा है कंक्रीट का जंगल। खेतों में प्राकृतिक रूप से मौजूद नमी तापमान संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है जबकि ईंटों और सीमेंट-बालू से बने मकानों से उष्मा का तेजी से उत्सर्जन होता है। इसके चलते लगातार तापमान में वृद्धि हो रही है।
यह है हीट वेव
वाराणसी। मौसम विज्ञानियों के मुताबिक जिस दिन अधिकतम तापमान सामान्य से पांच-छह डिग्री सेल्सियस अधिक होता है, उस दिन हीट वेव (तापलहरी) चलती है। यह स्थिति गर्मी के मौसम की सबसे खतरनाक होती है। ऐसे हालात में गर्मी से बचने के गंभीर उपाय करने चाहिए। खास तौर पर बच्चों और बुजुर्गों को गर्मी से बचाना चाहिए।
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हीट वेव (तापलहरी की आवृत्ति)
अवधि मई जून
1971-2000 34 39
2001-2010 27 50
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वर्ष अधि. तापमान (जून में)
2014 46.7 (छह जून)
2013 42.0 (नौ जून)
2012 46.0 (15 जून)
2011 44.4 (पांच जून)
2010 46.1 (दो जून)
2009 45.6 (22 जून)
2008 41.8 (एक जून)
2007 46.2 (तीन जून)
2006 44.2 (13 जून)
2005 44.0 (19 जून)
2004 41.5 (तीन जून)