वाराणसी। साईं बाबा का मंदिर बनवाकर पूजा करने को अंधविश्वास बताने पर द्वारका-शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती विवादों में घिर गए हैं। उनके इस बयान का काशी के साईं भक्तों ने विरोध किया है। एक तरफ साईं भक्त जहां इसे आस्था पर चोट करा दे रहे हैं, वहीं काशी के संत स्वामी स्वरूपानंद के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। संतों का कहना है कि साईं बाबा की गुरू के रूप में पूजा की जा सकती है। उन्हें भगवान का दर्जा नहीं दिया जाना चाहिए।
शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद ने कहा है कि भगवान के दस अवतारों में साईं बाबा का कहीं जिक्र नहीं आता। मंदिर भगवान का होता है। ऐसे में साईं बाबा की मूर्ति मंदिर बनाकर स्थापित करना शास्त्र सम्मत नहीं है। सनातनधर्मियों को इससे बचना चाहिए। शंकराचार्य की इस टिप्पणी से साई भक्त आहत हैं। अकथा(बेनीपुर) स्थित शिव साई मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष एमएल शर्मा और पुजारी शिव प्रकाश पाठक ने शंकराचार्य के इस बयान पर आपत्ति जताई है। ऊं साई मंदिर नदेसर के संस्थापक अखिलेश सिंह, पुजारी अखिलेश तिवारी ने भी कहा है कि शंकराचार्य की इस टिप्पणी से करोड़ों की संख्या में देश भर में फैले साईं भक्तों की भावना आहत हुई है। उधर, महामंडलेश्वर संतोष दास सतुआ बाबा ने शंकराचार्य की इस चिंता का समर्थन किया है। सतुआ बाबा ने कहा है कि साईं बाबा की गुरु रूप में पूजा उनके शिष्य कर सकते हैं लेकिन भगवान की मान्यता नहीं देनी चाहिए। इसी तरह राम जानकी मंदिर के उप महंत राम लोचन दास ने भी कहा है कि साईं बाबा को भगवान का दर्जा नहीं दिया जा सकता।