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सिल्वर स्क्रीन पर लोग समझेगें ‘सेवासदन’ का मर्म

Varanasi Updated Wed, 30 Jul 2014 05:30 AM IST
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वाराणसी। इस बार प्रेमचंद की जयंती पर लोग उनकी रचना सेवासदन के पात्रों को दृश्यों की मदद से पहचानेंगे। नायिका ‘सुमन’ के दुख-सुख पर हंसने और रोने का मौका फिल्म निर्देशक अजय मेहरा की फिल्म ‘बाजार-ए-हुस्न’ में मिलेगा। शूटिंग के लगभग 10 साल बाद यह फिल्म मंगलवार को रिलीज हुई। इसमें कथा के मर्म को समझाने के लिए काशी की गलियां, घाट, पुरानी कोठियों की मदद ली गई है।
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मुंशी प्रेमचंद का पहला महत्वपूर्ण उपन्यास ‘बाजार-ए-हुस्न’ उर्दू में साया हुआ। बाद में इसे सेवासदन शीर्षक से हिंदी में प्रकाशित किया गया था। निर्देशक अजय मेहरा ने ‘बाजार-ए-हुस्न’ शीर्षक से ही फिल्म बनाई है। उन्होंने कथा के स्थान और काल को बनाए रखने के लिए दृश्यों को काशी में ही बुना है। फिल्म में हालात की मारी नायिका सुमन (रेशमी घोष) के कोठे पर पहुंचने और फिर समाज के मुख्य धारा से जुड़ने की दास्तान दिखाई गई है। वर्ष 2004 में ‘बनारस 1918 ए लव स्टोरी’ के शीर्षक से इसकी शूटिंग हुई थी। बनारस के चेतसिंह किला, रामेश्वर, घाट, अन्नपूर्णा मिल, रामनगर किला, डीएवी कालेज सहित कई प्रमुख लोकेशन शूट किए गए थे। फिल्म में ओम पुरी, यशपाल शर्मा और राजेश्वरी जैसे दिग्गज कलाकारों ने प्रमुख भूमिकाएं निभाई हैं। संगीत खय्याम ने दिया है। अजय मेहरा का कहना है कि पोस्ट प्रोडक्शन में देर के चलते इसे रिलीज करने में वक्त लगा।
यह क्लास फिल्म है और इसका दर्शक वर्ग मल्टीप्लेक्स में जाने का अभ्यस्त है। ईद की मारामारी के कारण किसी मल्टीप्लेक्स में इसे जगह नहीं मिल पाई। साजन टॉकीज में प्रदर्शित इस फिल्म को ज्यादा दर्शक नहीं मिले। सिनेमा हॉल के मैनेजर विजय शंकर पांडे का कहना है कि नून और मैटिनी शो में मुश्किल से हाल की 30 फीसदी सीटें ही भर पाईं।
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शहर के कई कलाकारों ने इसमें भूमिकाएं निभाई हैं लेकिन उनको भी फिल्म के प्रदर्शन सूचना नहीं दी गई। शूटिंग से जुड़े रहे रंगकर्मी अनूप अरोड़ा को भी नहीं पता था कि यह फिल्म रिलीज हो गई है।
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