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पुलिस के डर से लोगों ने छोड़ा गांव

Varanasi Updated Tue, 02 Sep 2014 05:30 AM IST
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हरहुआ (वाराणसी)। बड़ागांव थाना क्षेत्र के सगुनहां गांव में पुलिस और ग्रामीणों में संघर्ष के अगले दिन सोमवार को भी तनावपूर्ण माहौल कायम रहा। पुलिस के डर से अधिकतर लोग गांव छोड़कर भाग गए हैं। कु छ घरों में सिर्फ महिलाएं और बुजुर्ग दिखे। उनका कहना है कि रविवार की रात पुलिस ने घरों में घुस कर बर्बरतापूर्वक पीटा। तोड़फोड़ की। डर के मारे लोगों ने घरों के दरवाजे बंद कर रखे थे, लेकिन पुलिस दरवाजे तोड़कर कई लोगों को उठा ले गई।
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सगुनहां निवासी विनोद सोनकर के बेटे रौनक की 18 जून को हत्या कर दी गई थी। मामले के एक आरोपी राहुल को अभी गिरफ्तार नहीं किया जा सका है। आरोप है कि राहुल ने विनोद के भांजे की पिटाई की थी, जिसके बाद रविवार को विनोद सोनकर एवं उसके समर्थकों ने राहुल के परिवार से जुड़े रौनक हत्याकांड के आरोपी बबलू मिश्रा के घर हमला कर दिया। आग लगाने की कोशिश की गई लेकिन पुलिस के पहुंचने से वे ऐसा न कर सके। ग्रामीणों और पुलिस के बीच करीब दो घंटे तक इससे गुस्साए ग्रामीण पुलिस से भिड़ गए। ग्रामीणों के पथराव के जवाब में पुलिस ने लाठीचार्ज किया और रबर की गोलियां चलाईं। बवाल थमने के बाद शाम से पुलिस ने सगुनहां और पास के सिसवां गांव में सर्च आपरेशन चलाया। सिसवां गांव की शारदा देवी ने बताया कि रविवार की रात पुलिस ने घर में घुसकर तोड़फोड़ की। जबकि, मुन्नी देवी ने बताया किपुलिस उनके निर्दोष लड़कों को पीटने के बाद उठा ले गई। घर के चूल्हे तक तोड़ डाले गए। खाना फेंक दिया गया। बेचने के लिए घर में रखी केला-सेब की पेटियां भी पुलिसवाले उठा ले गए। विभा मिश्रा ने बताया कि दरवाजा तोड़कर पुलिस उनके पति को उठा ले गई। कांता यादव का कहना था कि पुलिस कर्मियों ने उनके घर की छप्पर तोड़ दी। सगुनहां गांव निवासी बुजुर्ग पंचम ने बताया कि पुलिस की पिटाई से उनके पैर में चोट आई है।
कोट्स
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घटना में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, लेकिन जो लोग घटना में शामिल नहीं थे उन्हें तंग नहीं किया जाएगा। पुलिस यदि निर्दोषों को प्रताडि़त करती है तो उस पर भी कार्रवाई होगी। - एसके भगत, डीआईजी
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