वाराणसी। महाअष्टमी पर सुबह संधि पूजा के बाद ही महानवमी लगने के चलते गुरुवार को मठ-मंदिरों में शारदीय नवरात्र की पूर्णाहुति कर दी गई। कलशों में अभिमंत्रित मां के स्वरूप की लोक मंगल की कामना से षोडशोपचार विधि से पूजा हुई। इसके बाद घर-परिवार और राष्ट्र की उन्नति की कामना से होम किया गया। वहीं इच्छित फल की कामना से लोगों ने कुंवारी कन्याओं की पूजा-आरती की। प्रतिमाओं का विसर्जन शुक्रवार और शनिवार को होगा।
पंडालों में सुबह ढाक बजाकर मां की आरती की गई। हनुमान घाट स्थित कांची कामकोटि पीठ के शंकर मठ में संधि पूजा के बाद कुंवारी कन्याओं की पूजा की गई। वहीं पूरे शहर में कहीं नौ तो कहीं 11, 21 कन्याओं के पांव पखारे गये और उन्हें पूड़ी-पकवान खिलाने के बाद उपहार देकर विदा किया गया। रवींद्रपुरी स्थित अघोराचार्य बाबा कीनाराम स्थल पर कुंवारी कन्याओं के साथ भैरव की भी पूजा की गई। अघोर पीठाधीश्वर और सर्वेश्वरी समूह के अध्यक्ष बाबा सिद्धार्थ गौतम राम के निर्देशन में आचार्य धनंजय और डॉ. संगीता सिंह ने कन्याओं की आरती उतारी।