वाराणसी। पेट्रोल के दाम बढ़ने के साथ ही आटो रिक्शा चालकों ने हमेशा की तरह फिर से खुद किराए में मनमाने तरीके से वृद्धि कर दी। आटो यूनियन ने बढ़े रेट की सूची गुरुवार को ही जिला प्रशासन को ही सौंपी थी मगर उसे प्रशासन यह कह कर उस ओर से आंखें मूंद लीं कि इसका फैसला आरटीए की बैठक में लिया जाएगा। अब सवारी और आटो चालक सड़क पर भिड़ते हैं तो भिड़ें अपनी बला से।
जिला प्रशासन और आरटीए का हाल यह है कि 1995 से इस शहर में आटो चालक मनमाना किराया वसूल रहे हैं। इस बीच या तो आरटीए की बैठक हुई नहीं और हुई भी तो उसमें इस अहम मसले पर कोई फैसला नहीं हुआ। परिणाम भुगत रहे हैं शहरी। आरटीए की अंतिम बैठक अंतिम बार नौ दिसंबर 2011 को हुई। इस बैठक में शहर में चलने के लिए 220 आटो को सिटी परमिट दिया गया, लेकिन रेट तय नहीं हुआ। इसके बाद से बैठक की तिथि तय हो रही है और स्थगित हो रही है। अगली बैठक कब होगी पता नहीं। परिवहन विभाग के ही अधिकारी और कर्मचारी बताते हैं कि अंतिम बार वर्ष 1995 में आरटीए द्वारा शहर में आटो किराया का निर्धारण हुआ था। आरटीओ बृजेश कुमार सिंह का कहना है कि किराया निर्धारण स्टेट ट्रांसपोर्ट अथारिटी (एसटीए) करता है। तय करने से पूर्व एसटीए स्थानीय स्तर पर गठित आरटीए से सुझाव लेता है। सुझाव जानने पर अंतिम फैसला एसटीए ही करता है। वहीं एडीएम सिटी एमपी सिंह ने इस मुद्दे पर शुक्रवार को संभागीय परिवहन अधिकारी से वार्ता की जिसके बाद तय हुआ कि शासन स्तर से ही किराया निर्धारण होगा। शासन से स्वीकृति मिलने के बाद ही आटो किराया वृद्धि में हो सकेगी। एडीएम सिटी एमपी सिंह का कहना है कि आटो किराया वृद्धि के लिए यूनियन द्वारा मिले प्रस्ताव के साथ ही उन्होंने आरटीओ को पत्रक भेज दिया है, फैसला नियमानुसार ही होगा।