वाराणसी। काशी में अब महीने भर जन्म-जन्मांतर के पापों का शमन होगा। पुरुषोत्तम मास लगते ही शनिवार की सुबह संकल्प के साथ पंचक्रोशी परिक्रमा यात्रा आरंभ हो गई। मणिकर्णिका चक्रपुष्करणी के गंगा में डूबे होने की वजह से भक्तों को संकल्प गली में ही लेना पड़ा। नाव न चलने से पहले दिन पंचक्रोशी के यात्रियों को अस्सी तक की परंपरागत यात्रा का रूट भी बदलना पड़ा। आसपास के इलाकों से परिक्रमा पथ पर भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा है।
करीब चौरासी किमी लंबी पंचक्रोशी परिक्रमा सुबह मणिकर्णिका घाट जाने वाली गली में संकल्प लेने के साथ आरंभ हुई। बड़ी तादाद में भक्त देर शाम पहले पड़ाव कंदवा पहुंचे। पांच पड़ावों से होकर गुजरने वाली इस परिक्रमा से मनसा, वाचा, कर्मणा तीनों तरह के पापों का शमन होने की मान्यता है। भीमचंडी, रामेश्वर, पांचों पंडवा के बाद कपिलधारा पहुंचकर यात्रा पूरी होगी। महीने भर पंचक्रोश चलेगा। लोग घर-घर से तैयारी के साथ नंगे पांव निकल रहे हैं। उखड़े यात्रा मार्ग के अलावा पड़ावों पर बिजली, पानी का समुचित इंतजाम न होने से भक्तों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मणिकर्णिका तीर्थ पर जलभराव होने की वजह से भक्तों के बैठने तक की सुरक्षित ठांव नहीं है। भीड़ का दबाव लगातार बढ़ने से मुश्किलें बढ़ने की आशंका है।