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अवस्थापना मद में गोलमाल कर रहे हैं अधिकारी

Varanasi Updated Wed, 22 Aug 2012 12:00 PM IST
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वाराणसी। जिले के आधे से ज्यादा गांव विकास से संतृप्त हो गए हैं। उनमें मनरेगा के तहत काम कराने की गुंजाइश नहीं है। इसके बावजूद अधिकारी अवस्थापना मद की रकम के लिए केंद्र सरकार को झूठी रिपोर्ट भेज रहे हैं। इस रकम का मनमाने तरीके से दुरुपयोग किया जा रहा है। अधिनियम की गलत व्याख्या करके कर्मचारियों का शोषण किया जा रहा है। यह बात ग्राम विकास अधिकारी एसोसिएशन और ग्राम पंचायत अधिकारी, तकनीकी सहायक, रोजगार सेवक संघों को मिलाकर बनी संयुक्त संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने पराड़कर भवन में कही। उन्होंने बताया कि उत्पीड़न के खिलाफ 23 अगस्त को कचहरी पर धरना दिया जाएगा।
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ग्राम पंचायत अधिकारी संघ के प्रांतीय अध्यक्ष मनबोध लाल, रघुवंश विक्रम, शीतला प्रसाद पांडेय, लालचंद सिंह, राजेश दीक्षित ने कहा कि काशी विद्यापीठ में 37, चिरईगांव में 22 और हरहुआ में 47 गांवों में मनरेगा के तहत काम कराने की गुंजाइश नहीं रह गई है। इसके बावजूद डीआरडीए के परियोजना निदेशक एवं बीडीओ समीक्षा को तैयार नहीं हैं। मनमाने तरीके से धन का आवंटन करके उसको खर्च करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। आधे से ज्यादा काम कन्वर्जन के जरिए दूसरे विभागों से कराया जा रहा है। इसी मनमानी के चलते क्षेत्र पंचायतें मनरेगा काम ही नहीं करवा रही हैं। यह सब अवस्थापना मद से प्राप्त हुई रकम के मनमाने तरीके से बंदरबांट करने की वजह से किया जा रहा है। इस मद से ग्राम पंचायतों में टेंट खरीदा गया है जबकि महीनों से रोजगार सेवकों, तकनीकी सहायकों को वेतन तक नहीं दिया जा रहा है।
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