वाराणसी। युवाआें के लिए खुशखबरी है। युवावस्था में हो रहे ब्लड प्रेशर के कारण जानने और निदान के उपाय तलाशने के लिए कनाडा और जापान के वैज्ञानिकाें की मदद से बीएचयू के चिकित्सा विज्ञानी शोध करेंगे। इसके लिए पायलट प्रोजेक्ट तैयार किया गया है। बीएचयू समेत देश के विभिन्न शहराें में आठ रिसर्च सेंटर स्थापित किए गए हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने युवाआें में बढ़ते ब्लड प्रेशर पर चिंता जताई है। माना जाता है कि ब्लड प्रेशर के प्रमुख कारणाें में अत्यधिक नमक का सेवन भी है। डब्लूएचओ के दिशा-निर्देश पर इंडियन सोसाइटी आफ हाइपरटेंशन ने जापान और कनाडा के वैज्ञानिकों के सहयोग से पायलट प्रोजेक्ट तैयार किया है। इस प्रोजेक्ट में बीएचयू के तीन चिकित्सा विज्ञानी प्रो. रतन श्रीवास्तव, डा. मानषी श्रीवास्तव एवं डा. एसपी सिंह भी शामिल हैं। बीएचयू के सामुदायिक चिकित्सा विभाग में अक्तूबर से शोध कार्य प्रारंभ होगा। इसमें 20-40 उम्र वर्ग के 180 महिला-पुरुष की यूरिन को जापान के डा. मझोरी द्वारा विकसित एक विशेष प्रकार के यूरिन मेजरमेंट कप में संग्रहीत किया जाएगा। फिर यूरिन का वजन किया जाएगा। इसके बाद लैब में माइनस 20 डिग्री सेल्सियस तापमान पर सुरक्षित कर अध्ययन किया जाएगा। देश के आठाें रिसर्च सेंटरों में वर्ल्ड हाइपरटेंशन लीग, कनाडा के प्रधान वैज्ञानिक डा. अरुण चोकलिंगम के निर्देशन में शोध कार्य होगा।
शोध में पता लगाया जाएगा कि देश की युवा पीढ़ी खाने में अत्यधिक नमक का इस्तेमाल कर रही है या नहीं। साथ ही ब्लड प्रेशर के अन्य कारणाें और रोकने के उपाय भी तलाशे जाएंगे। आठों रिसर्च सेंटराें की रिपोर्ट डब्लूएचओ और भारत सरकार को भेजी जाएगी ताकि इस पर नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाये जा सकें - प्रो. रतन श्रीवास्तव, सामुदायिक चिकित्सा विभाग, बीएचयू
देश में स्थापित रिसर्च सेंटर :
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हैदराबाद में दो, बीएचयू, मुंबई, सूरत, चिदंबरम (तमिलनाडु), चेन्नई और दिल्ली में एक-एक सेंटर।