वाराणसी। रामनगर स्थित बाल संप्रेक्षण गृह में बुधवार को आत्महत्या करने वाले किशोर प्रवेश कन्नौजिया के अधिवक्ता पिता प्रमोद कन्नौजिया ने अपनी बेटे की मौत के लिए संप्रेक्षण गृह के कर्मचारियों को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कर्मचारियों की भूमिका पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
पोस्टमार्टम के बाद हरिश्चंद्र घाट पर गुरुवार की शाम प्रवेश का अंतिम संस्कार कर दिया गया। उसके पिता ने सवाल उठाया कि संप्रेक्षण गृह में तौलिया मिलता है, तो गमछा कहां से आया। कर्मचारियों ने बताया कि जिस वक्त संवासी खाना खा रहे थे तभी प्रवेश उठकर ऊपर चला गया था। सवाल यह कि कर्मचारियों ने उस समय उससे पूछताछ क्यों नहीं की। जिस शौचालय में आत्महत्या करने की बात बताई जा रही है वहां फंदा लगाने पर उसके बेटे का पैर जमीन से सटा था। उसके गाल पर चोट के निशान मौजूद थे। लगता था कि उसे घूसा मारा गया है। आरोप लगाया कि अभिभावकों के जाने पर कर्मचारी पैसा मांगते हैं। पैसा नहीं देने पर मुलाकात नहीं करने देते थे। पैसा नहीं देने पर उन्हें भी एक बार लौटा दिया गया था। साथ ही कर्मचारियों ने धमकी दी कि जबरदस्ती मिलने पर उसका हाथ-पैर तोड़ दिया जाएगा। उन्होंने भी कर्मचारियों को मुलाकात के लिए पैसे दिए थे ताकि उनका बेटा सुरक्षित रहे। संप्रेक्षण गृह में न तो ठीक से सफाई होती है और न ही ठीक खाना मिलता है। एक अन्य सवाल यह है कि जिस मामले में प्रवेश बंद था उसके मुख्य आरोपी राजेश को अब तक पुलिस नहीं पकड़ पाई। अधिवक्ता ने कहा कि भागने वाली लड़की की मां उनके मोबाइल पर फोन करके प्रवेश को दुनिया से उठाने की धमकी देती थी। कहा कि इस मामले में वे राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाएंगे।
घर पहुंचते ही संप्रेक्षण गृह से आई थी कॉल
वाराणसी। प्रमोद कन्नौजिया ने बताया कि घटना के दिन वह अपने बेटे से मिलने गए थे। घर पहुंचते ही फोन आया कि प्रवेश की तबियत खराब है। जल्दी आना जरूरी है। आरोप लगाया कि नाटीइमली की एक महिला के इशारे पर पुलिस ने प्रवेश को फंसाया गया था और गवाह रामनगर का रखा। आशंका जताई कि महिला के इशारे पर ही उनके बेटे को मारा गया।