वाराणसी। ‘गीत गीत में गिनती’ जैसे शिक्षाप्रद 12 बाल काव्य संग्रहों, ‘नई राह’ और ‘रिक्शा वाला’ की भांति प्रेरक 19 बाल कहानी संग्रहों, ‘ढोल बजा’, ‘हल्महल्ला’ आदि लोकप्रिय 22 शिशु गीत संग्रहों से हिंदी बाल साहित्य को समृद्ध करने वाले डा. श्रीप्रसाद के साथ हिंदी बाल साहित्य के एक युग का अंत हो गया।
डा. संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में 51 वर्ष पूर्व बतौर हिंदी शिक्षक नियुक्त हुए डा. श्रीप्रसाद हिंदी के रीडर पद से सेवानिवृत्त होने के बाद पूरी तन्मयता से साहित्य सृजन में लगे रहे। पांच जनवरी 1932 को आगरा के पारना गांव में जन्मे डा. श्रीप्रसाद विगत छह दशकों से बाल साहित्य के संरक्षण और संवर्द्धन में लगे रहे। 1995 में उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान लखनऊ द्वारा देश के सर्वोच्च साहित्य सम्मान बाल साहित्य भारती, 1999 में हिंदी साहित्य सम्मेलन प्रयाग द्वारा साहित्य महोपाध्याय की उपाधि से अलंकृत डा. श्रीप्रसाद के बाल साहित्य पर दो पीएचडी भी की गई है। वह एक मात्र ऐसे बाल साहित्यकार थे जिन्होंने ने 15 हजार से अधिक रचनाएं लिखीं। दो बाल उपन्यास ‘शाबाश श्यामू’ और ‘अंतू की आत्मकथा’ के अलावा ‘हिंदी बाल साहित्य की रूपरेखा’ और ‘बाल साहित्य की अवधारणा’ नामक उनकी दो समीक्षा पुस्तकें भी प्रकाशित हुई हैं। रूसी बाल साहित्यकार सैमुअल मारशाक के बाल नाटक का ‘छोटा सा घर’ नाम से हिंदी रूपांतरण किया जिसके अनेकानेक मंचन देशभर में हो चुके हैं। हिंदी बाल साहित्य की समृद्धि के लिए उन्होंने बांग्ला, अंग्रेजी और उर्दू की बाल कविताओं का भी अनुवाद किया।
इनसेट
डा. श्रीप्रसाद की रचनाएं
प्रमुख बाल काव्य संग्रह - ‘मेेरा साथी घोड़ा’, ‘खिड़की से सूरज’, ‘आ री कोयल’, ‘अक्कड़ बक्कड़ का नगर’, ‘ढम ढमा ढम’, ‘गीत ज्ञान विज्ञान के’, ‘भारत गीत’, ‘गुडि़या की शादी’, ‘आंगन के फूल’, ‘गीत बचपन के’, ‘ताक धिनाधिन’ तथा ‘मेरी प्रिय बाल कविताएं’ प्रकाशित हैं।
प्रमुख शिशु गीत संग्रह - ‘झिलमिल तारे’, ‘ढोल बजा’, ‘हल्लम हल्ला’, ‘चिडि़या घर की सैर’, ‘फूलों के गीत’, ‘तक तक धिन’, ‘खेलो और गाओ’, ‘गीत गीत में गिनती’, ‘मीठे मीठे गीत’, ‘अक्षर गीत’, ‘सीखो अक्षर गाओ गीत’, ‘बाल गीत’, ‘शुभम बाल गीत’, ‘गाओ गीत पाओ सीख’, ‘जगमग’, ‘झिलमिल’, ‘गुनगुन’, ‘रुनझुन’ आदि।
प्रमुख बाल कहानी संग्रह - संग्रह ‘रेल की सीटी’, ‘पिकनिक’ , ‘आ जा री सुख नींदरिया’, ‘नई राह’, ‘सरकस’, ‘खरगोश की सींग’, ‘रिक्शा वाला’, ‘मुनमुन के खिलौने’, ‘अपना घर’,‘गाड़ी देर से आई’, ‘पांच बाल कहानियां’, ‘कागज की नाव‘’, ‘नन्ही गिलहरी’, ‘उनसठवा जन्मदिन’, ‘समय के पंख’, ‘फ्लोसेंस नाइटिंगिल’, ‘वेताल पचीसी’, ‘मेरी प्रिय बाल कहानियां’, ‘दादी का पंचतंत्र’ आदि।
बाल नाटक संग्रह - ‘कृष्ण कथा’, ‘गुड्डे का जन्मदिन’, ‘एक थाल मोती से भरा’, ‘ढोल बजा’, ‘छोटा सा घर’, ‘पंचतंत्र के नाटक’ आदि।