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बाल संसद करेगी विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार

Varanasi Updated Sat, 08 Dec 2012 05:30 AM IST
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वाराणसी। संसद में एफडीआई के मुद्दे पर भले ही बसपा का साथ पाने के बाद सत्ताधारी दल के सांसद चैन की सांस ले रहे हों लेकिन इससे बाल सांसद बेचैन हैं। लल्लापुरा निवासी बाल सांसद ताज मोहम्मद को चिंता है कि कहीं उसके अब्बू की बिसादबाने की छोटी सी दुकान न बंद हो जाए तो रजिया को डर है कि कहीं अब्बू बेरोजगार हो गए तो उसका स्कूल जाना फिर बंद हो जाएगा।
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ऐसी चिंता से समाज के अन्य बच्चों को दूर रखने के लिए बाल संसद ने विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार करने का निर्णय लिया। शुक्रवार को विशाल भारत संस्थान, लल्लापुरा में आयोजित बाल संसद के विशेष सत्र में बाल सांसदों ने चिंता जताई कि खुदरा व्यापार में सीधे विदेशी निवेश से बड़ी संख्या में अभिभावक बेरोजगार हो जाएंगे। ऐसे में मदरसों और स्कूलों में शिक्षा प्राप्त कर रहे बच्चों को बाल मजदूरी के उसी खंदक में फिर गिरा दिया जाएगा जिससे वे बड़ी मुश्किल से निकल पाए हैं। बाल सांसद आफरीन का कहना था सरकारी प्रक्रियाएं भले ही हमें गुलामी की ओर ले जा रही हों लेकिन हम आजादी के लिए लड़ना नहीं छोड़ेंगे। बच्चों को सूचना के अधिकार के बारे में जागरूक करने का भी प्रस्ताव पारित हुआ। वहीं, सर्वसम्मति से ताजीम को प्रथम बाल लोकपाल नियुक्त किया गया। वहीं, सुप्रीम कोर्ट के वकील अशोक सहगल को बाल संसद ने अपना कानूनी सलाहकार बनाया है।
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