वाराणसी। मां जसजीत ने तीन दिनी सत्संग का आरंभ करते हुए पहले दिन शुक्रवार को कहा कि समय से ज्यादा मूल्यवान कुछ भी नहीं है। समय का सदुपयोग कर मनुष्य लक्ष्य की प्राप्ति कर सकता है। आस्था और श्रद्धा जब भरोसे से शुरू होती है तो वह अटल विश्वास बन जाती है। ईश्वरीय सत्ता को जब तक मनुष्य स्वीकार नहीं करेगा, तब तक सत्य की राह पर नहीं चल सकता।
दोपहर करीब एक बजे डीरेका रंगशाला में कथास्थल पर पहुंचीं मां जसजीत ने कहा कि हर इंसान अपने सामने वाले से सदव्यवहार की उम्मीद करता है लेकिन वह स्वयं ऐसा नहीं कर पाता। भक्तों को संदेश देते हुए कहा कि किसी व्यक्ति को सत्संग में ज्ञान की बातें तभी मिलतीं हैं, जब प्रभु का इशारा होता है। संत की वाणी सुनने से ही लाभ नहीं होता, उस पर अमल करने के साथ ही वैसा बनने की कोशिश करनी चाहिए। मां ने कहा कि सुख की कामना करने वालों को चाहिए कि वह वैसी राह चलने का प्रयत्न करें। अफसोस है कि उम्र गुजर जाती है लेकिन मनुष्य जागता नहीं। पांचवीं बार काशी आईं मां जसजीत ने कहा कि वह भक्तों के लिए दुआ मांगने और आशीर्वाद देने आई हैं। मां की कृपा पाने के लिए दूर-दूर से भक्त आए हैं। शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान भक्तों के लिए मां अपने प्रवास के दौरान दुआ करेंगीं। इससे पहले महिलाओं ने भजन पेश किए।
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कष्टों-रोगों से छुटकारे का दावा
वाराणसी। कथास्थल पर भक्तों को बताया जा रहा था कि मां को ईश्वर का साकार रूप में दर्शन हो चुका है। अत: उनके दर्शन और आशीर्वाद से शारीरिक, पारिवारिक, सामाजिक, मानसिक और आर्थिक परेशानियों दूर हो जाती हैं। इतना ही नहीं, लाइलाज बीमारियों जैसे कैंसर, अल्सर, हृदय रोग, ट्यूमर, दमा, त्वचा रोग और शुगर से छुटकारा मिलने का दावा तो किया ही जा रहा था, अनुयायी भूत-प्रेत की छाया से मुक्ति दिलाने का भी भरोसा दे रहे थे। कथा स्थल पर राहतकारी पानी और तेल के काउंटर भी लगाए गए हैं।
मां के वचन
प्रारब्ध कर्मों के कारण है। हर प्राणी को जीवन उतना ही मिलता है जितनी सांसें लिखी जा चुकी हैं। जीवन गतिमान होकर जितना बढ़ेगा, सांसों की डोर उतनी ही छोटी होगी। इसलिए समय रहते ईश्वर के चरणों में ध्यान लगाना चाहिए। -मां जसजीत