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पूरे एशिया की आजादी के स्वप्नद्रष्टा थे नेता जी

Varanasi Updated Wed, 23 Jan 2013 05:30 AM IST
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वाराणसी। आजादी की लड़ाई के योद्धा और आजाद हिंद फौज के संस्थापक सुभाषचंद्र बोस की जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में इतिहासकारों और शोधकर्ताओं ने उनके अतीत की फिर से पड़ताल करने पर बल दिया। विश्वविद्यालयों में नेताजी शोध पीठ बनाने की मांग भी उठी। वक्ताओं ने उन्हें भारत ही नहीं पूरे एशिया की आजादी का स्वप्नद्रष्टा बताया। इस मौके पर विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले सात लोगों को सम्मानित किया गया।
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भेलूपुर स्थित मैत्री भवन में विशाल भारत संस्थान की ओर से मंगलवार को आयोजित समारोह का शुभारंभ लखनऊ के आयकर आयुक्त जगदीश प्रसाद ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। मुख्य अतिथि और नेता जी के निजी ड्राइवर 111 वर्षीय निजामुद्दीन ने नम आंखों से नेता जी के चित्र पर माल्यार्पण किया। उन्होंने कहा कि वह ब्रिटिश फौज में थे लेकिन नेता जी से प्रभावित होकर आजाद हिंद फौज में भर्ती हो गए। ‘आज राष्ट्र को सुभाषवाद की जरूरत’ विषयक संगोष्ठी में बीएचयू के चीफ प्राक्टर प्रो. एके जोशी ने कहा कि निजामुद्दीन जीते जागते इतिहास हैं। बीएचयू के उप कुलसचिव राजन श्रीवास्तव ने कहा कि नेता जी पूरे एशिया की आजादी के स्वप्नद्रष्टा थे। विशिष्ट अतिथि आयकर आयुक्त लखनऊ ने नेता जी के त्याग और कार्य को समझने की जरूरत पर बल दिया। वरिष्ठ पत्रकार अनिल भास्कर ने कहा कि नेता जी के त्याग को अपनाकर बेहतर इंसान बनने से ही अच्छा हिंदुस्तान बनेगा। अध्यक्षता करते हुए प्रो. लक्ष्मण राय ने कहा कि नेता जी के बारे में और शोध होना चाहिए। इतिहास के पुनर्लेखन की अवश्यकता है। इस दौरान निजामुद्दीन को 5301 रुपए और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। संचालन पूजा भारतवंशी, डॉ. राजीव श्रीवास्तव और धन्यवाद डॉ. निरंजन श्रीवास्तव ने किया। इस दौरान मुख्य अतिथि ने प्रो. अशोक सिंह द्वारा संपादित शोध पत्रिका द ओरिजनल सोर्स का विमोचन किया। इससे पूर्व आजाद हिंद स्टूडेंट्स एसोसिएशन की ओर से बाइक रैली निकाल कर सुभाष पार्क सिगरा से मौत्री भवन तक कर्नल निजामुद्दीन की अगवानी की गई। इस दौरान आत्म प्रकाश सिंह ने कर्नल निजामुद्दीन को भारतरत्न देने की मांग की।
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