वाराणसी। आधी-अधूरी कार्ययोजना के चलते बीएचयू के कृषि विज्ञान संस्थान परिसर के 22 पोखरे सूख गए। मत्स्य पालन का काम भी बंद हो गया। इससे पूर्वांचल के उन मत्स्य पालकों को ज्यादा निराशा हो रही है जो विभिन्न जिलों से यहां की नर्सरी में बीज लेने आते थे। कुलपति डा. लालजी सिंह की ओर से गठित चार सदस्यीय कमेटी ने भी जांच में पाया है कि कार्ययोजना की खामी के चलते यह नौबत आई। यही नहीं, खर्च की गई धनराशि में भी अनियमितता का पता चला है।
उतर प्रदेश में मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने मेगा सीड प्रोजेक्ट के तहत 2008 में बीएचयू के कृषि विज्ञान संस्थान को 70 लाख रुपये दिए थे। इस धनराशि से विश्वविद्यालय के अरहर शोध प्रक्षेत्र में 22 पोखरों की खोदाई कराई गई ताकि मछलियाें की विभिन्न प्रजातियाें के बीज तैयार किए जा सकें। इन्हें मत्स्य पालकों को देना था। आईसीएआर से मिले रुपयों में सेे 50 लाख की लागत से पोखराें की खोदाई, 10 लाख में उपकरण और 10 लाख से पोखराें का रखरखाव होना था। तत्कालीन कृषि विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. शिवराज सिंह की देखरेख में पोखराें की खोदाई कराई गई। मत्स्य पालन भी शुरू हुआ। दिसंबर 2010 तक पोखराें में बीज डालने का काम चला, मगर इसी वर्ष प्रोजेक्ट इंचार्ज पारस नाथ के विदेश चले जाने से कृषि फार्म के अधिकारियाें में मत्स्य पालन को लेकर मतभेद शुरू हो गया।
कार्ययोजना में चूंकि यह तय नहीं किया गया था कि तालाबाें के स्थाई रखरखाव के लिए क्या-क्या व्यवस्था होगी, नतीजतन पिछले साल मत्स्य पालन का काम भी बंद हो गया। अब तो आईसीएआर ने पैसा देना ही बंद कर दिया है। इधर कमेटी ने जब जांच शुरू की तो पता चला है कि पोखरों की खोदाई के दौरान निकाली गई मिट्टी बेच दी गई। यही नहीं, मेगा सीड प्रोजेक्ट के तहत मिली धनराशि के खर्च में भी अनियमितता पकड़ी गई है। कमेटी के एक अधिकारी ने नाम न छापने के अनुरोध पर बताया कि खर्च की गई धनराशि का आडिट कराया जा रहा है। उसके बाद ही पता चलेगा कि कितनी अनियमितता हुई है।
कोट :-
आधी-अधूरी कार्ययोजना कैसे बना दी गई और पोखराें में मत्स्य पालन का काम क्यों बंद हो गया, इसकी जांच कराई जा रही है। जांच कमेटी हर पहलू पर गंभीरता से छानबीन कर रही है। यदि कृषि विज्ञान संस्थान का कोई भी अधिकारी दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।-प्रो. आरपी सिंह, निदेशक, कृषि विज्ञान संस्थान, बीएचयू