वाराणसी। शासन भले ही एएसपी क्राइम पद को प्रभावी करने में लगा हुआ है लेकिन जिलों में इसकी हालत खराब है। जमीनी हकीकत यह है कि वाराणसी जोन में कहीं भी एएसपी क्राइम की तैनाती नहीं है। उनके दफ्तर तक नहीं हैं। ऐसे में लोग शिकायत लेकर कहां जाएंगे।
एडीजी ला एंड आर्डर अरुण कुमार ने 14 मार्च को लखनऊ में प्रेस कांफ्रेंस कर कहा था कि प्रदेश के सभी जिलों में एएसपी क्राइम को प्रभावी बनाया जाएगा। दिल्ली, मुंबई और अहमदाबाद जैसे महानगरों की तर्ज पर प्रदेश की क्राइम ब्रांच काम करेगी। इसके कार्य को चार भागों में बांटा गया था। क्रिमिनल इंटेलीजेंस, डिटेक्शन एंड इंवेस्टीगेशन, क्राइम मानीटरिंग और आपरेशन। क्रिमिनल इंटेलीजेंस में जिलों की एसओजी को शामिल किया गया है। डिटेक्शन एवं इंवेस्टीगेशन में सीरियस क्राइम यूनिट, फाइनेंशियल फ्राड यूनिट और साइबर क्राइम यूनिट होगी। दरअसल एएसपी क्राइम की जमीनी हकीकत कुछ और ही है। वाराणसी में यह पद सृजित है लेकिन चार महीने से किसी की तैनाती नहीं है। एसएसपी कार्यालय में ही एएसपी क्राइम का दफ्तर खोला गया था। किसी की तैनाती न होने पर बाद में इस दफ्तर में महिला सेल को शिफ्ट कर दिया गया। वाराणसी में एएसपी क्राइम का प्रभार फिलहाल एसपी यातायात गोपेशनाथ खन्ना के जिम्मे है। चंदौली, गाजीपुर, जौनपुर, मिर्जापुर, भदोही, सोनभद्र, मऊ, आजमगढ़, बलिया में तो एएसपी क्राइम का पद ही नहीं है। जब पद ही सृजित नहीं है तो दफ्तर कहां से होगा। आईजी जोन जीएल मीना का कहना है कि एएसपी क्राइम को प्रभावी बनाने की प्रक्रिया जारी है। जल्द ही एसपी क्राइम की तैनाती की जाएगी।