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गंगा निर्मलीकरण यात्रा का काशी से श्रीगणेश

Varanasi Updated Mon, 18 Mar 2013 05:30 AM IST
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वाराणसी। पुरी पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती के निर्देशन में गंगा की अविरलता-निर्मलता के लिए मंदाकिनी यात्रा का रविवार की शाम श्रीगणेश हो गया। सुमेरु पीठ के स्वामी चिन्मयानंद और गंगा सेवा अभियान के राष्ट्रीय संयोजक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की मौजूदगी में बीएचयू सिंह द्वार पर महामना की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ यात्रा आरंभ हुई। गंगा भक्तों ने कहा कि सिर्फ हवाई योजनाओं से कुछ नहीं होगा। गंगा की निर्मलता के लिए सरकारों को तो दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय देना ही चाहिए, पावन प्रवाह की रक्षा के लिए नागरिकों को भी आगे आना होगा।
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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के अलावा विधायक अजय राय, डॉ. अशोक सिंह, गांगेय हंस, हाजी डॉ. अकबर अली, मुख्तार आलम बनारसी समेत पचासों गंगा भक्त मालवीय प्रतिमा से होकर लंका चौराहा, संकटमोचन, दुर्गाकुंड, भेलूपुर, सोनारपुरा, शिवाला से होते हुए अस्सी घाट पर पहुंचे। वहां हुई सभा में जानेमाने नदी वैज्ञानिक प्रोफेसर यूके चौधरी ने कहा कि विकास की अवधारणा को पहचाने बिना उठाए गए कदमों के चलते गंगा गोमुख से गंगा सागर के बीच बेहद नाजुक दौर से गुजर रही है। पश्चिमी नहरों के डिस्चार्ज की नए सिरे से समीक्षा की जानी चाहिए। कम से कम न्यूनतम प्रवाह निर्धारित किया जाना चाहिए ताकि गंगा को वेग शून्यता की स्थिति से बचाया जा सके। आदित्य वाहिनी के अध्यक्ष राजीव कुमार झा ने कहा कि पुरी के शंकराचार्य की ओर से गठित राष्ट्र उत्कर्ष अभियान के तहत यह यात्रा गंगा बेसिन से जुड़े चार अन्य प्रदेशों उत्तराखंड, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल से भी निकाली जाएगी।
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