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दरिंदगी की घटनाओं पर बोलीं युवतियां

Varanasi Updated Sun, 21 Apr 2013 05:30 AM IST
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वाराणसी। दिल्ली गैंगरेप की घटना के बाद देश भर में बहस छिड़ी। सड़क से संसद तक महिलाओं, युवतियों के सम्मान और सुरक्षा के लिए आवाज गूंजी। कानून को सख्त करते हुए सजा के नए प्रावधान किए गए। लेकिन, इन सारी कवायदों के बाद भी हालात नहीं बदले। न दरिंदगी की घटनाएं थमीं और न दरिंदों में खौफ पैदा हुआ। पिछले दो दिनों में अलीगढ़, दिल्ली और कुंडा में मासूमों के साथ हुईं दुष्कर्म की घटनाओं ने फिर एक साथ कई सवाल खड़े कर दिए हैं। न सिर्फ पुलिस बल्कि समाज के लिए भी। आखिर कैसे सुधरेंगे हालात? एक के बाद एक हो रही घटनाओं से चिंतित शहर की युवतियाें और छात्राओं के बीच जब इसका जवाब तलाशने की कोशिश की गई तो एक स्वर से उनका यही कहना था कि सिर्फ कड़े कानून बनाने से समस्या हल नहीं होने वाली। इसके लिए समाज की सोच बदलनी होगी। पुलिस की कार्यप्रणाली में बदलाव के साथ कानून का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना होगा।
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महिलाओं, लड़कियों के प्रति समाज की सोच बदलनी होगी। महज कानून बनाने से सरकार की भी जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती। महिलाओं की सुरक्षा के लिए बने कानून का सख्ती से पालन होना चाहिए। इसके अलावा सुरक्षा तंत्र को भी मजबूत बनाना होगा।
- गौरी भक्ते, सोनारपुरा

महिलाओं की सुरक्षा के लिए पिछले दिनों देश भर में बहस छिड़ी। लगा कि अब स्थितियां बदल जाएंगी। पुलिस की कार्यप्रणाली में भी सुधार की आस जगी। लेकिन, हालात और बदतर हो गए। अब वक्त आ गया है कि महिलाएं एकजुट होकर आगे आएं।
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ज्योति यादव, मछोदरी

सिर्फ कानून बनाने से लोगों में भय पैदा नहीं होगा। उसका कड़ाई से पालन कराया जाना जरूरी है। सरकार और समाज दोनों को सोचना होगा कि ऐसी घटनाओं पर अंकुश कैसे लगे। दरिंदों के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई और कड़ी सजा का प्रावधान होना चाहिए।
सुमन पांडेय, गायघाट

जितनी सख्ती पुलिस न्याय की गुहार लगाने वालों पर दिखाती है, यदि उतनी सख्ती दोषियों पर कार्रवाई करने में करे तो शायद पुलिसिया तंत्र पर इतने सवाल न उठें। पुलिस की कार्यशैली में बदलाव बहुत जरूरी है। महिलाओं की सुरक्षा के प्रति समाज को भी सचेत होना होगा।
अनामिका सिंह, बीएचयू

अब सरकार को और कड़ा रुख अख्तियार करना होगा। आरोपियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। इनका सामाजिक बहिष्कार होना चाहिए। जब सरकार और समाज दोनों तरफ से दबाव बनेगा तभी ऐसी मानसिकता वाले लोग हतोत्साहित होंगे।
- अंजना, भगवानपुर

इंसानियत को तार-तार करने वाले मासूम बच्चियों को भी नहीं बख्शते हैं। ऐसे लोगों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। तभी उनके भीतर खौफ पैदा होगा। सामाजिक सोच में भी बदलाव जरूरी है। इसके लिए लोगों को जागरूक किया जाना चाहिए।
पूजा, भेलूपुर

कड़े कानून, उम्रकैद और फांसी। ये सारी सजाएं वहशियाना हरकत करने वालों को नहीं रोक पा रही हैं। ऐसे लोगों को तो ऐसा सजा देनी चाहिए जिससे वो न ढंग से जी सकें और न ही मर सकें। तभी दूसरे ऐसे कदम उठान से पहले सौ बार सोचेंगे।
स्वाति गुप्ता, विशेश्वरगंज

दुष्कर्म की घटना को अंजाम देने वाले दरिंदे तो कड़ी सजा के हकदार हैं ही, साथ ही वो वर्दी वाले भी उतने ही दोषी हैं जिन्होंने न्याय मांगने वालों पर लाठियां बरसाईं और थप्पड़ मारा। एसीपी द्वारा लड़की पर हाथ उठाना भी बड़ा गुनाह है, उन्हें भी सजा मिले।
गुंजा, लंका

कानून बनाने से ही समस्या हल नहीं होगी। उसका कड़ाई से पालन भी सुनिश्चित करना होगा। लड़कियों को खुद अपनी सुरक्षा करनी होगी। बच्चियों के साथ हो रही घृणित घटनाएं सिर्फ कड़े कानून बनने से नहीं रुकेंगी। माता-पिता को ही जिम्मेदारी लेनी होगी।
दीपिका शर्मा, छित्तूपुर

हम तो अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी स्वयं पर ले सकते हैं लेकिन छोटी छोटी बच्चियों का क्या। उनके साथ हो रही दुष्कर्म की घटनाओं ने तो हमारी मानसिकता सवालिया निशान लगा दिया है। सामाजिक और नैतिक दोनों स्तरों पर हमें इसके बारे में सोचना होगा।
हिना परवीन, मदनपुरा
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