वाराणसी। विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण एनएन राय की अदालत ने शिक्षामित्रों के मानदेय का चेक जारी करने के नाम पर एक हजार रिश्वत लेते रंगे हाथ दबोचे गए डीपीआरओ आफिस के वरिष्ठ लिपिक अनिल विश्वकर्मा को दोषी पाते हुए उसे चार वर्ष की कड़ी कैद के साथ चार हजार रुपये जुर्माने की सजा मंगलवार को सुनाई।
एडीजीसी मुन्नालाल यादव के मुताबिक चौबेपुर के कैथी निवासी वादी रविप्रताप सिंह की भाभी रेनू सिंह और गांव की रंजना मिश्रा शिक्षामित्र पद पर कैथी में तैनात थीं। प्रधानाध्यापक ने दोनाें के मानदेय के चेक जारी किए। इसके बाद भी डीपीआरओ ने चेक आहरित करने के लिए लिपिक अनिल विश्वकर्मा को बीडीओ चोलापुर को पत्र लिखने को कहा। आरोप है कि लिपिक ने इस कार्य के लिए पंद्रह सौ रुपये रिश्वत की मांग की। वादी ने इसकी शिकायत सतर्कता अधिष्ठान के अफसरों से की। टीम ने 15 जून 2011 को डीपीआरओ आफिस से आरोपी लिपिक को एक हजार रुपये रिश्वत लेते समय गिरफ्तार कर लिया। आरोपी को जेल भेज दिया गया। अदालत ने अभियुक्त अनिल को भ्रष्टाचार निवारण के तहत दोषी पाया और सजा सुनाई।