अल्मोड़ा। विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों के शिष्टमंडल ने डीएम सविन बंसल से मुलाकात कर अल्मोड़ा कलक्ट्रेट को साइलेंट जोन घोषित करने के फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की। उन्होंने प्रशासन के इस फैसले को अव्यवहारिक बताया।
कलक्ट्रेट परिसर को ध्वनि प्रदूषण नियमावली के अंतर्गत साइलेंट जोन घोषित करके धरने, प्रदर्शन पर रोक लगाने पर विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों में नाराजगी है।
इस मुद्दे को लेकर विभिन्न संगठनों से जुड़े दर्जनों लोगों के एक शिष्टमंडल ने डीएम सविन बंसल से मुलाकात की। वार्ता में विभिन्न संगठनों की ओर से उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के अध्यक्ष पीसी तिवारी ने कहा कि कलक्ट्रेट प्रांगण में धरना, प्रदर्शन पर बगैर राय मशविरे के रोक लगने से जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन हुआ है। संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि कलक्ट्रेट चंद राजाओं के समय से ही सामाजिक, राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र है।
आजादी की लड़ाई से लेकर पीड़ित लोग अपनी व्यथा लेकर यहां आते हैं। यदि इसे बंद किया गया तो जनता परेशान होगी। डीएम ने कहा कि ज्ञापन देने पर रोक नहीं है और प्रशासन ने धरना, प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की है। उन्होंने कहा कि प्रशासन खुले मन से इस मामले में वार्ता कर पुनर्विचार करेगा और इसके लिए बैठक बुलाई जाएगी।
वार्ता में पालिकाध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी, लोक वाहिनी के पूरन चंद्र तिवारी, दयाकृष्ण कांडपाल, उक्रांद के शिवराज बनौला, जनवादी महिला संगठन की सुनीता पांडे, सीपीएम के आरपी जोशी, सभासद अशोक पांडे, बाड़ेछीना के प्रताप बिष्ट, उपपा की आनंदी वर्मा, यूसुफ तिवारी, अमीनुर्रहमान, लीला आर्या, रेखा धस्माना, विमला देवी, ललित चौधरी आदि थे। शांति व्यवस्था के मद्देनजर कलक्ट्रेट में पुलिस व्यवस्था भी की गई थी।