सरकारी स्कूलों में पढ़ाई का बेहतर माहौल बनाने और बच्चों को सुविधाएं मुहैया कराने के सरकारी दावे खोखले साबित हो रहे हैं। इसका बड़ा उदाहरण जिले के राजकीय प्राथमिक और जूनियर हाइस्कूल हैं। इन स्कूलों के 48,716 बच्चों को अब तक निशुल्क ड्रेस नहीं मिली है, जबकि नया शिक्षा सत्र शुरू हुए दो माह का समय बीत चुका है। योजना के तहत अन्य कार्यों के लिए भी अब तक बजट नहीं मिलने से सर्व शिक्षा अभियान के कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
सर्व शिक्षा अभियान के तहत सरकार राजकीय प्राथमिक स्कूलों और राजकीय जूनियर हाइस्कूलों में पढ़ने वाले बीपीएल श्रेणी के छात्रों, सभी वर्गों की छात्राओं और अनुसूचित जाति, जनजाति के बच्चों को दो-दो जोड़ी निशुल्क स्कूल ड्रेस उपलब्ध कराती है। प्रत्येक पात्र विद्यार्थी को दो-दो जोड़ी ड्रेस देने के लिए चार-चार सौ रुपये की दर से स्कूलों को धनराशि दी जाती है। सरकारी स्कूलों का नया शिक्षा सत्र एक अप्रैल को प्रारंभ हो गया है, लेकिन अब तक पात्र बच्चों को स्कूल ड्रेस उपलब्ध नहीं हो सकी है।
जिले के कुल 1407 राजकीय प्राथमिक स्कूलों में ड्रेस के पात्र बच्चों की संख्या 25171 और 498 जूनियर हाइस्कूलों में 23545 है। नई ड्रेस नहीं मिलने से बच्चे या तो पुरानी ड्रेस पहनकर आ रहे हैं या बिना ड्रेस के ही स्कूल पहुंच रहे हैं। वहीं, योजना के तहत अन्य मदों स्कूल ग्रांट, मेंटीनेंस, जूनियर हाइस्कूलों में कंप्यूटर लगाने, प्रबंधकीय व्यय, प्री-टेस्ट बुक आदि के लिए भी बजट अब तक अवमुक्त नहीं हुआ है। इसके अलावा सर्व शिक्षा अभियान के तहत कार्यरत बीआरपी और सीआरपी तीन माह के वेतन से वंचित हैं।
सर्व शिक्षा अभियान के स्कूलों के शिक्षकों के तीन माह के वेतन के लिए ही पूर्व में 12.20 करोड़ रुपये बजट मिला था। बच्चों के स्कूल ड्रेस और अन्य मदों के लिए शासन से बजट अवमुक्त नहीं हुआ है। शासन से इस सप्ताह बजट अवमुक्त होने की उम्मीद है।
राय साहब यादव, जिला परियोजना अधिकारी, सर्व शिक्षा अभियान, अल्मोड़ा।