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गांवों की समस्याओं का नहीं हो रहा समाधान

अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा। Updated Mon, 13 Jun 2016 12:19 PM IST
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महिला पंचायत प्रतिनिधि - फोटो : अमर उजाला
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अल्मोड़ा। ताकुला ब्लॉक की महिला पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि गांवों में व्याप्त जन समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है। कई बार गांव की शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, जंगली जानवरों की समस्याओं से मुख्यमंत्री, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती है।
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वीरांगना ग्राम पंचायत महिला जनप्रतिनिधि संगठन के बैनर तले यहां पहुंची महिला पंचायत प्रतिनिधि पत्रकारों से वार्ता कर रही थी। पच्चीसी बिजोरिया की वार्ड सदस्य बसंती आर्या ने कहा कि नहरें क्षतिग्रस्त हैं, लेकिन उन्हें ठीक करने वाला कोई नहीं है। सड़क के अभाव में गर्भवती महिलाओं को दिक्कतें होती हैं।

मवे गांव की वार्ड सदस्य दुर्गा देवी ने कहा कि सोमेश्वर अस्पताल में एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड जैसे उपकरण नहीं हैं। खीराकोट की प्रधान रमा भाकुनी ने कहा कि जंगली सुअरों और बंदरों ने खेती चौपट कर दी है। सरकार को शिकारियों की टीम बनाकर सुअरों को नियंत्रित करना चाहिए। ढुमड़ गांव की उप प्रधान तारा देवी ने कहा कि आपदा और सूखे से फसल को हुई क्षति का मुआवजा नहीं मिला है।
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अर्जुनराठ की प्रधान नंदी देवी ने कहा कि ताकुला ब्लॉक मुख्यालय तक सड़क नहीं बनी है। गांव में शौचालय बना चुके ग्रामीणों को स्वजल विभाग से अनुदान नहीं मिला है। ग्रामीण उत्थान समिति कपकोट की सचिव बसंती कपकोटी और द हंग प्रोजेक्ट की उत्तराखंड समन्वयक कमला भट्ट ने पंचायत में महिलाओं के सशक्तिकरण पर जोर दिया।

इस अवसर पर उप प्रधान तारा भंडारी, कौशल्या बिष्ट, पार्वती आर्या, निर्मला बोरा, हंसी बोरा, लक्ष्मी देवी, कौशल्या आर्या, पार्वती आर्या, सरिता देवी, विमला आर्या, आशा वर्मा, सामाजिक कार्यकर्ता पुष्पा बोरा, बसंत पांडे, बीना जोशी, तुलसी साह आदि मौजूद थे।
 
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