अमर उजाला ब्यूरो
अमरोहा। शुगर लॉबी की दादागिरी से अन्नदाता हलकान हैं। गन्ना मूल्य भुगतान को बनाई सरकार की नीति का पहले पायदान पर ही उल्लंघन होने लगा है। मिलें अपने तेवर दिखाने लगी हैं। जिसका उदाहरण वेव शुगर मिल धनौरा है। जिसमें 12 नवंबर से तौल शुरू हो गई थी, लेकिन 14 दिन से ऊपर निकलने के बाद भी अभी तक किसानों को भुगतान के नाम पर फूटी कौड़ी भी नहीं मिली है। ऐसे में 35 हजार किसानों के साथ सीधे तौर पर छल किया जा रहा है। सरकार ने नए रेट और पार्ट टू पेमेंट की नीति लागू करने के साथ ही किसान को गन्ना तुलने के 14 दिन के अंदर 240 रुपये के हिसाब से भुगतान की नीति बनाई थी। जिसका शुरुआत में ही उल्लंघन होने लगा है। बता दें कि वेव मिल धनौरा ने नौ नवंबर को बायलर पूजन के साथ पेराई सत्र की शुरूआत कर दी थी। 12 नवंबर को गन्ना तौल भी शुरू हो गई थी। मिल में तौल शुरू हुए 17 दिन हो चुके हैं। किसान भुगतान नहीं किए जाने से असमंजस में हैं।
क्या ब्याज का भुगतान करेगी मिल
दरअसल, सरकार ने गन्ना भुगतान की नीति में 14 दिन के भीतर भुगतान न करने पर ब्याज सहित भुगतान करने के निर्देश दिए हैं। जिसमें वेव शुगर मिल धनौरा का भुगतान का वक्त 14 दिन से ऊपर निकल गया है। अब ऐसे में सवाल यह उठता है कि मिल पार्ट-वन पेमेंट यानि 240 रुपये का भुगतान ब्याज सहित करेगी या फिर किसानों के साथ इसमें भी धोखा किया जाएगा।
क्या कहते हैं किसान नेता
14 दिन बीतने के बाद भी भुगतान न करना मिल की वादाखिलाफी है। जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संगठन आंदोलन के जरिए किसानों की आवाज उठाएगा और शोषण किसी कीमत पर नहीं होने देगा।
-चौधरी उम्मेद सिंह, जिलाध्यक्ष, भाकियू(टिकैत)
किसानों को हर तरफ से छला जा रहा है। पहले सरकार ने पार्ट-टू-पेमेंट की नई नजीर डालकर किसानों का हनन किया है। अब मिलें भी समय पर भुगतान न करके अन्नदाता को मारने की तैयारी में है। अगर मिलों ने नीति के अनुसार 14 दिन में भुगतान नहीं किया, तो आंदोलन किया जाएगा।
-चौधरी दिवाकर सिंह, प्रांतीय महासचिव, भाकियू(भानु)
क्या कहते हैं जिम्मेदार
अगर मिल गन्ना तुलने के 14 दिन में भुगतान नहीं करती है, तो उस पर ब्याज लगाने का नियम है। जिसे हर हाल में अमल में लाया जाएगा। अगर कोई चीनी मिल इसका उल्लंघन करेगी, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
-मैनेजर चौरसिया, जिला गन्ना अधिकारी