बागेश्वर। बंगाली मूल के देवाशीष महाराज ने कपकोट में मां ठाकुरे विद्यालय के नाम पर शिक्षा की अलख आज से 30 साल पहले जगाई थी। जो आज तक अविरल चल रही है। उनके असामयिक निधन से क्षेत्र में शिक्षा का एक आधार स्तंभ का ढह गया है। उनके इस विद्यालय से 33 बच्चों का घोड़ाखाल विद्यालय के लिए चयन हुआ। कई उच्च पदों पर पहुंचे।
देवाशीष महाराज ने 1982 में कपकोट में मां ठाकुरे विद्यालय की नींव रखी। तब तक क्षेत्र में अच्छी शिक्षा का बड़ा अभाव था। आज इसे बंगाली स्कूल के नाम से जाना जाता है। यहां लगभग 400 बच्चे अध्ययनरत हैं। देवाशीष महाराज ने शिक्षा की ऐसी ज्योति जलाई कि आधुनिक शिक्षा में आज क्षेत्र अग्रणी भूमिका निभा रहा है। उनके विद्यालय से 33 बच्चे सैनिक स्कूल घोड़ाखाल में चयनित हुए। कई इस वक्त बड़े ओहदों पर हैं। जिनमें से दीपक कर्म्याल सेना के उच्चाधिकारी तथा हरिओम वर्मा ने पीसीएस संवर्ग के वाणिज्यकर अधिकारी हैं। देवाशीष के निधन के बाद शिक्षा के क्षेत्र में जगी अलख की लौ भी धीमी पड़ने की आशंका है। उनकी इस विरासत को आगे बढ़ाने की चुनौती है। उनके निधन से लोग दु:खी है। महाराज द्वारा दिखाई गई शिक्षा की रोशनी के लिए क्षेत्र के लोग हमेशा की उन्हें याद करते रहेेंगे।