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सरयू नदी में डाला जा रहा मल-मूत्र

Bageshwar Updated Sat, 22 Dec 2012 05:31 AM IST
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बागेश्वर। ‘नमो गंगे तरंगे पाप हारिनी ....’ पुराणों में मां गंगा और उसकी सहायक नदियों के पवित्र जल में स्नान मात्र से तमाम पापों का हरन होने का उल्लेख किया गया है। जीवनदायिनी गंगा, सरस्वती, सरयू, गोमती आदि नदियों को मां का दर्जा हासिल है। वह मां जिसके पानी से जीवन चलता है आज वहीं सरयू नदी प्रदूषित हो गई है। मां को प्रदूषण की गिरफ्त में भी उनके ही बच्चों ने कर दिया है। बागेश्वर की प्रसिद्ध सरयू नदी में यहां के लोगों ने ही घरों का सीवर छोड़ रखा है। प्रशासन, सिंचाई विभाग और नगर पालिका परिषद को भी इससे कोई सरोकार नहीं है। नदी के किनारे शौचालय तक बना दिए गए हैं। सैकड़ों लोग नियमित नदी किनारे शौच के लिए भी जाते हैं। क्या जीवनदायिनी मां के साथ ऐसा सलूक किया जाता है। यदि श्रद्धा वास्तव में लोगों के दिल में होती तो मां सरयू में मल, मूत्र तो नहीं डाला जाता।
बागेश्वर जिले के सरमूल से निकलने के बाद गांवों और बस्तियों में पहुंचते ही सरयू नदी का स्वागत कूड़े और गंदगी से हो रहा है। लोहारखेत, मुनार, सोंग, रीठाबगड़, चीराबगड़, भराड़ी, कपकोट आदि कस्बों और गांवों से ही सरयू नदी में कूड़ा-कचरा आदि डालना शुरू हो जाता है। बागेश्वर पहुंचने के बाद नदी की हालत बहुत खराब हो जाती है। नगर से लगे कठायतबाड़ा से लेकर बिलौना गांव तक दर्जनों स्थानों पर घरों की सीवर खुलेआम सरयू में बहाई जा रही है। प्रतिदिन श्रमिक और खानाबदोश किस्म के सैकड़ों लोग इसके किनारे शौच के लिए जाते हैं। कठायतबाड़ा से लेकर बागनाथ मंदिर के बीच नदी के किनारे कई शौचालय भी बना दिए गए हैं। कई शौचालयों की गंदगी सीधे नदी में पहुंच रही है। कई होटलों का कचरा भी नदी में ही आता है। संगम पर अधजले शवों और शवदाह की अवशेष लकड़ियों से भी प्रदूषण बढ़ रहा है। बारिश के दिनों में नदी का प्रवाह तेज होने पर नदी में गंदगी अधिक नजर नहीं आती है लेकिन गर्मियों में प्रदूषण के चलते नदी में स्नान करना काफी मुश्किल हो जाता है।
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उत्तरायणी पर्व पर बागेश्वर के सरयू-गोमती तट पर स्नान करने का विशेष महत्व माना गया है। हजारों लोग इस दिन बागेश्वर पहुंचते हैं। मकर संक्रांति सहित कई अन्य पर्वों पर भी आस्थावान लोग संगम पर स्नान करने आते हैं लेकिन नदी में प्रदूषण इतना बढ़ गया है कि लोग अब नदी में नहाने से बच रहे हैं। नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए प्रशासन, सिंचाई विभाग और नगरपालिका परिषद ने आज तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं जिससे स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। दूसरी तरफ नदी का यह पानी लोगों 15 हजार की आबादी को पानी की आपूर्ति की जा रही है।
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