पहाड़ में पारा बढ़ने के साथ ही जंगलों का धधकना शुरू हो गया है। जंगलों की आग में बेशकीमती वन संपदा जलकर राख हो रही है। वन्य जीव, पक्षी भी आग में जल गए हैं। वहीं वन विभाग की तैयारियां आग लगने के बाद सिर्फ बुझाने तक ही सीमित है।
बागेश्वर वन प्रभाग के जंगलों की सीमा चमोली, पिथौरागढ़ और अल्मोड़ा जिले के सीमाओं तक फैली हुई है। इसमें करीब 77 हजार हेक्टेयर भूमि में आरक्षित वन क्षेत्र हैं। जंगलों को आग से बचाने के लिए हर साल 15 फरवरी से 15 जून तक फायर सीजन चलता है। इधर अप्रैल में पारा 40 के पार होने के साथ ही जंगलों में आग की घटनाएं भी बढ़ गई हैं।
अभी तक मनकोट, रवाईखाल, कफलखेत, जौलकांडे, गरुड़, बैजनाथ, कौसानी के जंगलों में आग लग चुकी है। आंकड़ों पर गौर करें तो अभी तक आग की 13 घटनाएं हुई हैं इनमें 18 हेक्टेयर जंगल जलकर राख हो चुका है। वहीं इस आग में बेशकीमती वन संपदा के साथ 38 हजार का लीसा, लकड़ी जलकर नष्ट हो गया है।
नहीं पकड़ में आ रहे आग लगाने वाले
आए दिन जंगलों से धुआं निकलते दिख रहा है। हालत इतनी बदतर है कि आसमान में एक धुंध सी छा गई है। वहीं वन विभाग आग लगने के कारण और लगाने वालों को पकड़ने में नाकाम रहा है। यह जरूर है कि आग लगने की सूचना लगते ही वन कर्मी मौकेे पर पहुंच कर घंटों पसीना बहाकर आग बुझाने में कामयाब रहे हैं।
वन विभाग है अलर्ट
डीएफओ बलवंत सिंह शाही ने बताया कि जंगलों में आग को लेकर वन विभाग अलर्ट है। सभी छह रेंजों में रेंजर, वन दरोगा, फायर वॉचर काम कर रहे हैं। आग लगने की सूचना पर टीम मौके पर पहुंच कर तुरंत आग बुझा रही है। आग लगाने वालों के लिए भी दूरबीन से निगरानी और इनको पकड़वाने वाले को पांच हजार का ईनाम दिया जा रहा है।
बुधवार को भी धधके जंगल
बीते दो सप्ताह से धधक रहे जंगलों में बुधवार को भी आग लगी रही। बुुधवार को मनकोट, जौलकांडे और जिला मुख्यालय के समीप के ही जंगलों में दिनभर आग लगी रही। ग्रामीणों ने बताया कि वन विभाग को सूचित करने के बाद भी वन विभाग आग की घटनाओं पर काबू नहीं कर पा रहा है। आग की घटनाओं से वातावरण में धुंध छाई है। जंगलों की आग लोगों की सेहत पर भी बुरा असर डाल रहे हैं।
आग बुझाने को हैं 29 क्रू स्टेशन, 116 फायर वॉचर
जंगलों में आग पर काबू पाने के लिए 29 क्रू स्टेशन बनाए हैं। हर स्टेशन पर चार फायर वॉचर इस तरह कुल 116 वॉचर तैनात हैं। वॉचरों को आग से बचने को एक-एक जोड़ी जूते, टॉर्च दिए हैं। वन पंचायतों को 200-200 फायर रैक भी उपलब्ध कराए हैं।
आग की जंगलों पर मार, आप भी पड़ोगे बीमार
जंगलों की आग से सिर्फ वन संपदा ही खाक नहीं हो रही है बल्कि आम जनता भी प्रभावित हो रही हैं। जंगलों में आग के धुएं आंखों में जलन, दमा, खांसी के मरीजों की संख्या बढ़ी है। सुबह शाम टहलने वाले बुजुर्ग, लोगों में इस तरह की समस्याएं बढ़ी हैं। वहीं इस आग से ग्लोबल वार्मिंग बढ़ने से तापमान भी बढ़ रहा है। इससे त्वचा संबंधी बीमारी भी हो रही है। जिला अस्पताल के डॉ. मुन्ना लाल ने बताया कि धुएं से बचाव करना जरूरी है। खासकर बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और दमा के रोगियों के लिए। अगर धुएं से बचाव नहीं किया तो ये जानलेवा भी हो सकता है।