टनकपुर। जिलाधिकारी श्रीधर बाबू अद्दांकी का सीमांत चूका क्षेत्र के दौरे ने नेपाल सीमा पर बसे गांवों में विकास की उम्मीद जगाई है। विरान जंगल से घिरे इस इलाके के लोग अधिकारियों के जत्थे को अपने बीच देख खासे उत्साहित हुए। डीएम के दौरे से गदगद लोगों ने दिल खोल कर समस्याएं उठाते हुए अधिकारियों से इस पिछड़े क्षेत्र को भी विकास की मुख्य धारा से जोड़ने की गुहार लगाई। अधिकारी भी दुर्गम इलाके के लोगों की जटिल जिंदगी का अहसास कर लौटे हैं। दौरे का असर विकास पर कितना पड़ता है यह तो भविष्य बताएगा।
मां पूर्णागिरि धाम से लगे घने जंगलों से घिरा सीमांत चूका क्षेत्र नेपाल सीमा से लगा है। नब्बे के दशक तक इस क्षेत्र के लोगों की सुरक्षा भगवान भरोसे थी। नेपाल के वन्यजीव तस्करों को गढ़ रहे इस क्षेत्र में अब भी तस्करों का डेरा बना रहता है, मगर एसएसबी की तैनाती से अब लोग खुद को सुरक्षित मानने लगे हैं। अलग राज्य बनने के बाद शासन-प्रशासन की निगाह भी इस उपेक्षित पर पड़नी शुरू हुई, मगर विकास आज भी यहां के लिए सपना बना हुआ है। वर्ष 2002 में तत्कालीन जिलाधिकारी ने पहली बार इस क्षेत्र का दौरा कर लोगों में विकास की उम्मीद जगाई थी, लेकिन फिर भी लोगों की जटिल जीवनशैली में बदलाव नजर नहीं आया। शुक्रवार को मौजूदा जिलाधिकारी श्रीधर बाबू अद्दांकी के दौरे से ग्रामीण खासे उत्साहित हैं। इस बात का अंदाजा वहां के लोगों की भावना से लगाया जा सकता है। ग्राम प्रधान दशरथ सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता खीमानंद पांडेय एवं सुंदर सिंह का कहना है कि विकास की बात तो दूर जिलाधिकारी के क्षेत्र में आने से ही उनके आधे दर्द दूर हो गए हैं।