एप डाउनलोड करें
विज्ञापन

समृद्ध है परंपरागत औषधीय प्रणाली : प्रो. भट्ट

Champawat Updated Mon, 04 Mar 2013 05:31 AM IST
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

पिथौरागढ़। राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में जंतु विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार का समापन हो गया है। तीन दिनों तक चले सेमिनार में देश के ख्यातिलब्ध वैज्ञानिकों ने मूल्यवान औषधीय प्रजातियों पर मंथन किया।
विज्ञापन
विज्ञापन

समापन समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हए गढ़वाल विश्वविद्यालय के जंतु विज्ञान के विभागाध्यक्ष प्रो. जेपी भट्ट ने कहा कि इस्लामिक (गजनी औरंगजेब) और बिट्रिश आतताइयों के आगमन से पूर्व परंपरागत औषधीय प्रणाली की विरासत बहुत समृद्ध थी। उस युग में भारतीय औषधि पद्धति को सर्वोच्च स्थान हासिल था। विदेशी घुसपैठियों के आतंक के साए तले भारतीय ऋषि, मुनियों ने अपने औषधीय ज्ञान को छुपा कर रखा। साथ ही अपनों से भी छुपाया, ताकि औषधीय संपदाओं का दोहन न हो सके। नई दिल्ली से आए डा. सोमनाथ डिपास ने विलुप्त होती औषधीय प्रजातियों पर फिरसे शोध शुरू करने पर जोर दिया। डीआरडीओ दिल्ली से आए कर्नल प्रो. हिमाश्री प्रो. एन पुनेठा, डा. अजय शुक्ल ने भी सारगर्भित विचार रखे।
समापन अवसर पर शोधार्थियों के लिए विज्ञान पर आधारित पोस्टर प्रदर्शनी का आयोजन किया गया जिसमें वनस्पति विज्ञान वर्ग में कविता नेगी, रसायन में ममता लटवाल, जंतु में हिमांशु जोशी, फॉर्माकोलाजी में गौरव कुमार केसरी ने पहला स्थान प्राप्त किया। समापन की अध्यक्षता प्राचार्य डा. डीएस पांगती ने की। सेमिनार समन्वयक प्रो. राकेश कुमार ने सभी का आभार जताया। डा. विवेक केडिया, अनीता जोशी, जीवन चंद्र, अनिल का सेमिनार संचालन में विशेष सहयोग रहा।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
एप में पढ़ें