चंपावत। वर्ष 1988 में टाउन एरिया के रूप में अस्तित्व में आए चंपावत नगर को अब नगरपालिका का दर्जा मिल गया है। इस अंतराल में यही एकमात्र ऐसा नगर निकाय है जहां पर आरक्षण का रोटेशन पूरा हो रहा है। टाउन एरिया के प्रथम पालिकाध्यक्ष और नगर पंचायत के प्रथम अध्यक्ष सामान्य वर्ग से थे। बीच के समय में अध्यक्ष के पद किसी न किसी वर्ग के लिए आरक्षित होते रहे। अब प्रथम नगरपालिका अध्यक्ष का पद भी सामान्य वर्ग के खाते में जा रहा है।
चंपावत को जब टाउन एरिया का दर्जा मिला तब इसकी आबादी मात्र 1780 थी। मथुरालाल साह सामान्य वर्ग से टाउन एरिया के प्रथम चेयरमैन बने। उसके तुरंत बाद 1991 में टाउन एरिया को अपग्रेड कर नगर पंचायत का दर्जा दिया गया और प्रथम अध्यक्ष बनने का सौभाग्य सामान्य वर्ग के ही सुनील साह को मिला। नगर पंचायत बनते समय यहां की आबादी बढ़कर 2525 हो गई। नगर पंचायत के अगले अध्यक्ष के चुनाव के समय यह सीट पिछड़ी जाति की महिला के लिए आरक्षित हो गई और पूनम वर्मा अध्यक्ष बन गई। वर्ष 2008 में हुए निकाय चुनाव के समय अध्यक्ष का पद अनुसूचित जाति की महिला के लिए आरक्षित हो गया और जैलाल अध्यक्ष बन गई। पिछले चुनाव के समय नगर की आबादी 3958 थी। तब नगर पंचायत में वार्डों की संख्या मात्र चार थी।
दिसंबर 2011 में सरकार ने चंपावत नगर पंचायत को अपग्रेड कर नगरपालिका का दर्जा दे दिया। वार्डों की संख्या बढ़कर सात हो गई है। सात वार्डों की कुल आबादी 8697 है। नगरपालिका के अध्यक्ष का पद सामान्य वर्ग के लिए तय हो चुका है। जानकारों का कहना है कि चंपावत नगर पंचायत में अध्यक्ष पद के आरक्षण को लेकर किसी प्रकार के विवाद की स्थिति नहीं है। कुमाऊं के अन्य नगर निकायों में चाहे अध्यक्ष पद के आरक्षण को लेकर सवाल उठ रहे हों लेकिन चंपावत में आरक्षण का रोटेशन पूरा हो गया है। यदि सरकार ने आरक्षण की व्यवस्था को पारदर्शी तरीके से लागू किया तो अगले चुनाव में यानि कि 2018 में अध्यक्ष का पद फिर से आरक्षित हो जाएगा।