चंपावत। जिले में प्राकृतिक सुदंरता की अकूत मेहरबानी, खूबसूरत पहाड़ी नजारे, धार्मिक और आध्यात्मिक स्थलों की लंबी फेहरिस्त, साहसिक पर्यटन को लुभाने वाले स्थलों की भरमार है, लेकिन फिर भी यह जिला सैलानियों के लिए पसंदीदा स्थल नहीं बन पा रहा है। जिला बनने के 16 वर्ष बाद भी यहां पर्यटकों की तादाद में खास इजाफा नहीं हो रहा है। उस पर प्रशासनिक सुस्ताई का आलम यह कि 16 वर्ष के लंबे अंतराल के बाद एक भी नया पर्यटक स्थल नहीं खोजा जा सका है।
जिले में कुदरती श्यामलाताल झील है। मायावती का अद्वैत आश्रम बंगाली सैलानियों के आकर्षण का सबसे बड़ा केंद्र हैं। मां पूर्णागिरि धाम न केवल सूबे के प्रमुख तीर्थस्थल में है, बल्कि जिले की अर्थव्यवस्था की भी रीढ़ भी है। रीठासाहिब में स्थित गुरुद्वारे ने इस इलाके को प्रदेश की सीमाओं से बाहर नई पहचान दी है। इसी तरह मां बाराही धाम देवीधुरा के बग्वाल (पत्थर युद्ध) ने देश के अनेक हिस्सों में इस नन्हें क्षेत्र के लिए कौतूहल जगाया हैै। बावजूद इसके जिले में पर्यटन उद्योग के विकास को पंख नहीं लग सके हैं।