चंपावत। स्कूलों में दाखिले के लिए आमतौर पर मारामारी रहती है। मगर जिला मुख्यालय का जीआईसी (राजकीय इंटर कालेज) इस मायने में अपवाद है। यहां दाखिले की होड़ तो दूर उल्टा पढ़ने वालों की संख्या कम है। छठी कक्षा में ही कुल आठ छात्र हैं। शिक्षक अशोक खर्कवाल का कहना है कि पांच साल पूर्व ये संख्या 25 थी। अब सवाल यह है कि छात्रों की इस घटती संख्या के लिए कौन जिम्मेदार है। दरअसल, कालेज में शिक्षकों के अधिकांश पद खाली हैं, जिस कारण छात्रों की पढ़ाई नहीं हो पाती है। वर्तमान में कॉलेज में 344 छात्र हैं।
शिक्षा का अधिकार (आरटीई) लागू किए जाने से शिक्षा का हक तो मिल गया मगर छात्रों को पढ़ाने के लिए गुरुजी की व्यवस्था अब तक नहीं हो सकी है। शिक्षकों की जबर्दस्त कमी है। प्रभारी प्रधानाचार्य केके भारद्वाज का कहना है कि कुल 27 सृजित पदों में से 14 की तैनाती लंबे समय से नहीं हो सकी है। हाल इस कदर बुरे हैं कि कला संकाय में संस्कृत को छोड़ किसी अन्य विषय के प्रवक्ता नहीं है। वहीं विज्ञान और गणित विषय को पढ़ाने के लिए एलटी शिक्षक भी नहीं हैं। ऐसी हालत में यहां न तो छात्र संख्या बढ़ रही है और न पढ़ाई का स्तर। अभिभावक भी यहां के बजाय मोटी फीस देकर प्राइवेट स्कूलों की ओर जाने को मजबूर हो हैं।