चंपावत। होली का काउंटडाउन शुरू हो गया है। साथ ही मिलावटखोरी का खतरा भी बढ़ गया है। इसके लिए छापामार अभियान शुरू भी कर दिया गया है। मगर संसाधनों की कमी चुनौती बन रहा है।
जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी अश्विनी कुमार का कहना है कि विभागीय संसाधनों की कमी से काम बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। चार तहसीलों में मात्र एक खाद्य अधिकारी है। चंपावत को छोड़ किसी भी तहसील में निरीक्षक नहीं है। छापामारी के लिए वाहन तक नहीं है। अन्य संसाधन भी आधे-अधूरे हैं। इन स्थितियों में खाद्य पदार्थों की सैंपलिंग भी पर्याप्त संख्या में होना कठिन हो रहा है। जिले में कहीं भी परीक्षण प्रयोगशाला भी नहीं है। नमूनों का परीक्षण रुद्रपुर में किया जाता है, जहां अक्सर इसके नतीजे आने में देरी होती है।
दूध और इससे बने उत्पाद की खपत में 40 प्रतिशत से ज्यादा इजाफा होता है। मावा, मिठाई, दूध, पनीर समेत तमाम खाने-पीने की वस्तुओं की मांग तो बढ़ती है पर आपूर्ति में अंतर नहीं आता। ऐसे में बढ़ी खपत की भरपाई अमूमन मिलावट के जरिए होती है।