पिथौरागढ़। इस तहसील के कई गांवों में कुरमुला कीट ने धान, मडुवा, सोयाबीन की फसल को नष्ट कर दिया है। अब रबी की फसल बोने का समय आ रहा है। किसान इस बात से चिंतित हैं कि कहीं आगामी फसल के साथ भी यही स्थिति पैदा न हो जाए। मोस्टामानू, मैला, गौड़ियागांव, ढुंगा, छेड़ा, गोरंगघाटी के गांवों में इस बार कुरमुला का प्रकोप रहा। इसकी वजह कम बारिश बताई गई है। कम बारिश में कुरमुला कीट ज्यादा पनपता है।
इस तहसील के करीब 15 गांवों में कुरमुला कीट का जबर्दस्त प्रकोप हुआ है। जिन इलाकों में जमीन में नमी की मात्रा कम होती है वहां पर कुरमुला अधिक पनपता है। कुरमुला का एक जोड़ा 200 से 300 अंडे देता है। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डा. आरके सिंह ने बताया कि कुरमुला को समाप्त करने के लिए ट्राइकोडर्मा नाम से जैविक दवा और क्लोरोपाइरीफोर्स नाम से रासायनिक दवा आती है। इस दवा को खेतों में डालने से कुरमुला कीट समाप्त हो जाता है। कुरमुला कीट पौधों की जड़ों को काट देता है। इससे पौधा सूखने लगता है। उसमें फलों का विकास नहीं हो पाता।
मोस्टामानू के प्रगतिशील काश्तकार इकबाल अहमद ने मुख्य कृषि अधिकारी को पत्र लिखकर मांग की है कि रबी की फसल की बुआई से पहले किसानों को कीटनाशक उपलब्ध कराया जाए। रबी की फसल की बुआई का समय 15 अक्तूबर से शुरू होगा। उससे पहले कीटनाशक मिल जाए तो किसान खेतों की जुताई के समय इसका छिड़काव कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस बार मोस्टामानू तथा आसपास के गांवों में करीब 100 नाली के खेतों में कुरमुला का असर पड़ा है।