चंपावत। नौजवानों को तकनीकी हुनर देने के लिए इस सत्र में खुले राजकीय पालीटेक्निकों में तालाबंदी है। आखिर ये ताले खुलें भी तो कैसे? प्रवेश प्रक्रिया निपटने के दो माह बाद भी प्रवक्ताओं की नियुक्ति नहीं हो सकी है। नतीजा यह कि दाखिला लेने वाले युवक भटक रहे हैं।
पुराने पालीटेक्निकों में अगस्त के पहले हफ्ते से प्रथम वर्ष की कक्षाएं संचालित हो चुकी हैं, लेकिन चंपावत सहित प्रदेश के 13 नए राजकीय पालीटेक्निकों में सिर्फ दाखिले हुए हैं। यहां 28 अगस्त तक प्रवेश की प्रक्रिया पूुरी की गई। लोहाघाट पालीटेक्निक के प्रवक्ता अैर चंपावत के प्रभारी कमलेश आजाद ने बताया कि एक ट्रेड (इलेक्ट्रानिक्स) वाले चंपावत राजकीय पालीटेक्निक में 25 सीटों में से 16 दाखिले ही हुए। गोरलचौड़ मैदान के पास नगर पालिका के भवन को अस्थाई रूप से पालीटेक्निक बनाया गया है। मगर पहली सितंबर से शुरू होने वाले शिक्षण कार्य का आगाज दो माह से अधिक बीतने पर भी शुरू ही नहीं हो सका है, जबकि लोहाघाट, टनकपुर सहित प्रदेश के पुराने पालीटेक्निक में अगस्त से ही पढ़ाई शुरू हो चुकी है।
नए पालीटेक्निक में दाखिला लेने वाले छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। वे पुराने संस्थानों से तीन माह पिछड़ गए हैं। छात्रों का कहना है कि पाठ्यक्रम पूरा करने के लिए पर्याप्त वक्त मिलना भी मुश्किल होगा। संसदीय सचिव हेमेश खर्कवाल का कहना है कि प्रवक्ताओं की जल्द से जल्द नियुक्ति की तकनीकी शिक्षा मंत्रालय से मांग की गई है।