मस्टा संगीत कला समिति की ओर से बैठकी होली हुई। इसमें देर रात तक होल्यार विभिन्न रागों में झूमते रहे।
होल्यारों ने विभिन्न रागों में होली गीतों की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को देर रात तक बांधे रखा। समिति के सचिव कैलाश भट्ट के आवास में हुई बैठकी होली का शुभारंभ होल्यार सीएस मौनी ने राग पीलू में ‘सब दुख दूर करो भोलेनाथ, अलख निरंजन नाम तिहारो’ गीत से किया। एमएन पचौली ने राग काफी में ‘जै-जै-जै शिव शंकर भोलेनाथ दिगंबर’ गीत की शानदार प्रस्तुति दी।
दीपक लडवाल ने राग काफी में ‘गाओ सुहागन होली, फागुन ऋतु शुभ अलबेली’, पंकज पचौली ने ‘रघुनंदन खेले होली, खेलें अवध के नर नारी’, बीएस मेहता ने राधा-कृष्ण की ठिठोलियों का वर्णन करते हुए ‘ये कैसी प्रीत लगाई, श्याम तुम बड़े हरजाई’ होली गीत पेश किए। एलएम सोराड़ी ने राग जंगला काफी में ‘कैसी बंशिया बजाई घनश्याम’, आचार्य केसी भट्ट ने राग पीलू में ‘दिवानी में राम की मोरा दरद न जाने कोय’, एमसी भट्ट ने राग विहाग में ‘सखि प्यारी प्यारी अंखिया राधे की’ गीत ने समां बांध दिया।
ललित सोराड़ी ने राग सहाना में ‘बंय्या पकड़ मुख मलत गुललवा, अब तो तिहारी बन आई छयलवा’ होली गाई। होली महफिल में रबीश पचौली, हरीश जोशी, महेश चंद्र, बीसी भट्ट, संजय, प्रकाश, अर्जुन दीपा, गोदावरी ने सुर में सुर मिलाया। तबले में ताल सौरभ अवस्थी, दीपक लडवाल ने ठोकी।