चंपावत में चालू हालत में बैंक आफ बड़ौदा का एटीएम।
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बैंकों की तीन दिन की छुट्टी का शनिवार को पहला दिन था। पहले दिन से ही लोगों की मुश्किलें बढ़ने लगी। एटीएम खुले तो थे, मगर लोगों की जरूरतों को पूरा नहीं कर पा रहे थे। किसी भी एटीएम से लोगों को 2000 रुपए से अधिक रकम नहीं मिल रहे थे।
जिला मुख्यालय के ही पांच एटीएम में रकम नहीं थी। पंजाब नेशनल बैंक, यूनियन बैंक तो शटर डाउन ही थे। वहीं शांत बाजार स्थित एसबीआई के एटीएम सहित कुल पांच एटीएम में नगदी नहीं थी। लोग यहां आकर दूसरे एटीएम की दौड़ लगाने को मजबूर थे। एसबीआई की मुख्य शाखा वाला एटीएम, आईडीबीआई, बॉब, यूको आदि बैंकों के एटीएम चल तो रहे थे, लेकिन लोगों के 2500 रुपए यहां भी नहीं मिल रहे थे। इन एटीएम से 2000 रुपए ही निकल पा रहे थे। 500 रुपये के नोट अभी तक चंपावत नहीं पहुंचे हैं। इसकी मार न केवल रकम वापस करने में भुगतनी पड़ रही है, बल्कि एटीएम से भी 2500 के बजाय 2000 रुपए ही मिल पा रहे हैं। वहीं एटीएम से 100 रुपये के नोट भी नहीं निकल रहे हैं।
66 फीसदी तक गिर गया एलआईसी का कारोबार
नोटबंदी का बीमा व्यवसाय पर भी व्यापक असर पड़ा है। भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की स्थानीय शाखा में नोटबंदी से पहले जहां रोजाना सात से आठ लाख रुपए जमा होते थे। अब ये रकम गिरकर ढाई से तीन लाख रुपए तक पहुंच गई है। एलआईसी के सहायक प्रबंधक अशोक ओली का कहना है कि नोटबंदी का स्थानीय शाखा के कारोबार में 66 फीसदी तक असर पड़ा है।पहले जहां 20 से 25 तक नए बीमा होते थे। उनकी संख्या अब पांच से सात तक हो गई है। एलआईसी के सामने एक और समस्या पैदा हो गई है इसमें अब एलआईसी एजेंट प्रीमियम की राशि के रूप में सिक्के जमा कर रहे है। इन सिक्कों की बहुतायत से बैंक के साथ लेनदेन में दिक्कतें आ रही है।