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मासूमों की जान से खिलवाड़

Haridwar Updated Tue, 10 Sep 2013 05:37 AM IST
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रुड़की। नियमानुसार एक वैन में सात सवारियां बैठाई जा सकती हैं। लेकिन सोमवार को जिस स्कूल वैन में आग लगी थी, उसमें 17 बच्चे सवार थे। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि स्कूली वाहनों में बच्चों को किस तरह ठूंस-ठूंसकर भरा जाता है। कमाई के चक्कर में बच्चों की जान जोखिम में डाली जाती है। कई संचालक तो कंडम वाहनों का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि पुलिस और परिवहन विभाग इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। विभागों की यह लापरवाही किसी दिन बड़े हादसे का रूप ले सकती है।
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शहर में 50 के करीब निजी स्कूल हैं। इनमें से दो-चार को छोड़कर सभी स्कूलों में बच्चों को लाने और ले-जाने के वैन का इस्तेमाल किया जाता है। हर स्कूल की वैन में क्षमता से कई गुना अधिक बच्चों को बैठाया जाता है। कमाई के चक्कर में संचालकों ने वैन को अपने ढंग से मोडिफाई कर सीटें हटाकर बैंच आदि लगा रखी हैं। चालक इनमें बच्चों को ठूंस-ठूंसकर भरते हैं। एक वैन में औसतन 15 से 25 तक बच्चों बैठाया जा रहा है। लेकिन पुलिस-प्रशासन और परिवहन विभाग इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।

अधिकांश वैन हो चुकी है कंडम
बच्चों को लाने और ले-जाने में जिन वैनों का संचालन हो रहा है, उनमें से अधिकांश कंडम हो चुकी हैं। लेकिन इसके बाद भी उनका संचालन हो रहा है। यही वजह है कि ऐसी स्कूल वैनों आए दिन छोटी-बड़ी दुर्घटनाएं होती रहती हैं। कुछ समय पहले रुड़की-मंगलौर रोड पर एक वैन में आ लग गई थी। लक्सर में बच्चों से भरी एक कंडम स्कूली बस भी खड्ड में गिर गई थी। इस हादसे में तीन बच्चों की मौत हो गई थी।
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अभिभावकों को भी देना होगा ध्यान
स्कूली वैन संचालकों की मनमानी के लिए कुछ हद तक अभिभावक भी जिम्मेदार हैं। अभिभावकों को ध्यान देना चाहिए कि वैन में चालक कितने बच्चे ले जा रहा है। वैन की हालत क्या है। उनके बच्चे को बैठने के लिए सीट मिल भी रही है या नहीं। यदि वैन या बस कंडम हालत में हो या फिर क्षमता से ज्यादा बच्चे बैठे हों तो उसमें अपने बच्चों को कतई स्कूल न भेजें। स्कूल प्रबंधन और प्रशासन से भी उसकी शिकायत करें।

कोट...
अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल के नाम से पंजीकृत वाहन से ही स्कूल भेजें। यदि वाहन में क्षमता से अधिक बच्चे हो तो तत्काल उसकी जानकारी विभाग को दें। क्षमता से अधिक बच्चों को वैन में बैठाने वाले वाहनों को सीज किया जाएगा। इसके लिए एक अभियान भी चलाया जाएगा।
- सुनील शर्मा, एआरटीओ, हरिद्वार

कंडम और डग्गामार वाहनों को स्कूल वाहन के रूप में इस्तेमाल किया जाना नियम विरुद्ध है। क्षमता से अधिक बच्चों का बैठाना भी गलत है। इसको लेकर पुलिस अभियान चलाएगी। अभियान के दौरान पकड़े जाने वाले वाहनों को सीज किया जाएगा।
- अजय सिंह, एसपी देहात, हरिद्वार


क्या कहते हैं अभिभावक
स्कूल दूर होने की वजह से वैन से बच्चों को भेजना पड़ता है। वैन में ज्यादा बच्चे होने की जानकारी है। लेकिन कोई विकल्प न होने से बच्चों को वैन से भेजने को मजबूर होना पड़ता है। प्रशासन को कंडम वैनों को बंद कराना चाहिए।
- राधिका, अभिभावक

स्कूल के लिए जो भी वैन आदि चलाई जाएं। परिवहन विभाग को गहनता उन्हें चेक करना चाहिए। यदि वाहन चलने लायक न हो तो उसे बंद करा देना चाहिए।
- मोहन शर्मा, अभिभावक

पुलिस-प्रशासन को वैन संचालकों की बैठक लेनी चाहिए, जिसमें उन्हें निर्देश देने चाहिए कि वह क्षमता से अधिक बच्चों को न बैठाएं। वैन में बच्चों को भेजते हुए डर लगता है। लेकिन कोई ओर विकल्प न होने से मजबूरी है।
- शिखा, अभिभावक

बच्चों की वैन में आग लगने की जानकारी मिली है। इस संबंध में बुधवार को संबंधित स्कूल की प्रधानाचार्य से मिलेंगी। साथ ही खटारा वैन से बच्चों को भेजने पर रोक लगाने की मांग करेंगी।
- किरण भाटिया, पार्षद, नगर निगम रुड़की।

कब-कब हुए हादसे
- 11 सितंबर, एक स्कूल की वैन में आग लगी। सभी बच्चे सुरक्षित रहे।
- अगस्त 2012 , बीएसएम तिराहे के समीप एक्सल टूटने बड़ी दुर्घटना होने से बची। वैन में 18 बच्चे सवार थे।
- फरवरी 2013 को लक्सर में खटारा स्कूल बस खड्ड में गिरी, दो बच्चों की मौत।
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