हरिद्वार। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) में 23 पदों पर हुई भर्ती में नया गोलमाल होने का मामला सामने आया है। 24 घंटे अस्पतालों में सुविधा उपलब्ध कराने के लिए भर्ती संबंधित अस्पतालों के सीएमएस को ही करनी थी, लेकिन बिना किसी आदेश के सीएमओ ने रुड़की एवं हरिद्वार के दोनों अस्पतालों के लिए भर्ती कर दी। इसका खुलासा मिशन निदेशक डा. नीरज खैरवाल की ओर से जारी किए पत्र के मिलने से हुआ है। इस मामले में सीएमएस बोले कि सीएमओ से गाइड लाइन मांगी थी और भर्ती कर ली वहीं सीएमओ का कहना है कि भर्ती कोई भी हो सीएमएस को कोई भी अधिकार नहीं होता है।
प्रदेश के छह शहरों के अस्पतालों में 24 घंटे जांच की निशुल्क सुविधा उपलब्ध कराए जानी थी। यह सुविधा पहले एक मार्च से शुरू होनी थी। पहले से ही पर्याप्त स्टाफ न होने के चलते 24 घंटे सुविधा के लिए अलग से स्टाफ भर्ती किया जाना था। भर्ती प्रक्रिया पूरी करने के बाद इस योजना को एक अप्रैल से लागू करने का निर्णय लिया गया। लेकिन प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगने से यह प्रक्रिया अटक गई। कब से 24 घंटे अस्पताल संचालित होंगे इस पर कोई निर्णय नहीं लिया जा सका। लेकिन दूसरी ओर सीएमओ ने विज्ञापन जारी कर भर्ती प्रक्रिया पूरी कर ली है। इसके लिए 28 व 29 मार्च को साक्षात्कार हुए और 31 मार्च को परिणाम जारी कर दिया। एक अप्रैल से सभी ने कार्य करना शुरू कर दिया। भर्ती होने के बाद पूरी प्रक्रिया में अनियमितता की शिकायत उच्च अधिकारियों की गई। जिसमें स्वास्थ्य निदेशक डा. अजीत गैरोला ने सोमवार को सीएमओ हरिद्वार कार्यालय पहुंचकर जांच के लिए भर्ती फाइल की प्रति ली। मालूम हो कि सीएमओ डा. सुषमा गुप्ता 31 मार्च को सेवानिवृत्त हुई थी, उससे एक दिन पहले ही भर्ती प्रक्रिया पूरी की।
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यह था मिशन निदेशक का पत्र
मिशन निदेशक डा. नीरज खैरवाल की ओर से 25 फरवरी को सीएमएस देहरादून, हरिद्वार, हल्द्वानी, रूद्रपुर, रुड़की, कोटद्वार को पत्र जारी किया गया था। जिसमें चयनित अस्पतालों में 24 घंटे निशुल्क जांच कार्य के लिए लैब टेक्नीशियन, लैब सहायक, एक्स-रे टेक्नीशियन की उपलब्धता अपने स्तर से करने की बात कही गई। दूसरा यह भी आदेश जारी किया गया था कि भर्ती कर मानदेय के लिए वांछित धनराशि भी अवमुक्त की जा रही है। इस पत्र की प्रतिलिपि सीएमओ सहित डीएम, मिशन निदेशक, अपर निदेशक एवं वित्त नियंत्रक, चिकित्सा सचिव और प्रमुख सचिव को भेजी गई थी।
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इन पदों पर की गई भर्ती
लैब टेक्नीशियन के सात, एक्स-रे टेक्नीशियन के चार, लैब अटेेंडेंट के छह, लैब टेक्नीशियन ब्लड बैंक के तीन, फील्ड सुपरवाइजर, मेडिकल ऑफिसर एक, पीडियाट्रीसीया के एक पद पर भर्ती की गई।
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अन्य स्थानों पर नहीं हुई भर्ती
जनपद हरिद्वार के अलावा प्रदेश के अन्य अस्पताल भी 24 घंटे निशुल्क जांच के लिए देहरादून, हल्द्वानी, रुद्रपुर व कोटद्वार के अस्पताल चुने गए थे। लेकिन अस्पतालों में सुविधा का संचालन कब से करना है इससे संबंधित कोई दिशा निर्देश जारी नहीं किया गया। जिसके चलते किसी भी अन्य जनपद में भर्ती नहीं की गई।
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वर्जन
मिशन निदेशक की ओर से जारी पत्र के अनुसार सीएमओ से गाइड लाइन मांगी गई थी। सीएमओ की ओर से कोई गाइड लाइन जारी नहीं की गई। 28 मार्च को सूचना दी गई कि 28 और 29 मार्च को साक्षात्कार प्रक्रिया में शामिल होना है। आदेशानुसार वह चले गए। उन्हें तो बाद में पता चला कि जो उन्हें भर्ती करनी थी, उसे सीएमओ कार्यालय से किया जा रहा है। वरिष्ठ अधिकारी होने के चलते वह विरोध नहीं कर सके। अलबत्ता भर्ती से नियुक्त किए स्टाफ को तैनाती देनी पड़ी।
डा. ज्योति बोहरा, सीएमएस, जिला अस्पताल।
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सीएमएस को भर्ती करने की कोई पावर नहीं होती। सीएमएस को केवल सदस्य बतौर शामिल किया जाता है और वह किया गया। सीएमओ को पूरी टीम बनाने का अधिकार है। मिशन के तहत भर्ती पाकसाफ प्रक्रिया के तहत की गई। कुछ लोग अनावश्यक की बातें कर रहे है। जांच के लिए तैयार हैं। आगे जो अन्य जनपदों में भर्ती होंगी वहा पर पता चल जाएगा कि भर्ती कौन करता है।
डा. सुषमा गुप्ता, पूर्व सीएमओ, हरिद्वार।