उत्तराखंड आपदा ग्रस्त क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं का सुरक्षित प्रसव स्वास्थ्य महकमे के लिए एक बड़ी चिंता बन गया है। कई गांवों के संपर्क मार्गों से कटे होने से जननी सुरक्षा कार्यक्रम बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
अब आनलाइन वेबपोर्टल एमसीटीएस (मदर एंड चाइल्ड ट्रेकिंग) से मिली जानकारी के मुताबिक सड़क मार्ग से कटे प्रभावित क्षेत्रों में 1377 गर्भवती महिलाएं जिनका इस माह के अंत तक प्रसव होना है।
तमाम कोशिशों के बाद अभी तक विभाग 577 महिलाओं से संपर्क साध पाया है। आपदा प्रभावित क्षेत्रों में गांवों में चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाने या फिर मरीजों को अस्पताल तक लाने में टूटी सड़के बड़ी समस्या बन गई है। गर्भवती महिलाओं के सुरक्षित प्रसव करवाने के लिए अस्पताल लाना संभव नहीं हो पा रहा है।
पता ढूंढने में आ रही दिक्कतें
विभाग ने प्रत्येक क्षेत्र में गर्भवती महिला की ट्रैकिंग के लिए सूचना संकलित कर अपने वेबपोर्टल पर डाली है, जिससे ऐसी महिलाओं के नाम पते मिल गए हैं जिनका 31 जुलाई से पूर्व प्रसव की तिथि दर्शाई गई है। अभी तक चिन्हित कुल 1377 महिलाओं से 867 को तलाशा जाना बाकी है, जिनके दूरभाष या मोबाइल फोन काम नहीं कर रहे।
कार्यवाहक महानिदेशक स्वास्थ्य डा. जीपी जोशी ने जानकारी दी है कि आपदा प्रभावित क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं के सुरक्षित प्रसव लिए वेबपोर्टल एमसीटीएस पर संकलित सूचना के अनुसार गर्भवती महिलाओं एवं उनसे संबंधित एएनएम तथा आशा को मोबाइल फोन से संपर्क किया जा रहा है।
सुरक्षित प्रसव करवाने के लिए 108 कालसेंटर से गर्भवती महिलाओं को काल कर तलाशा जा रहा है। इस मुहिम से विभाग 137 गर्भवती महिलाओं का सुरक्षित प्रसव भी करवाने में कामयाब रहा है।
डोलियां भेंजी, एंबुलेंस अलर्ट पर
स्वास्थ्य विभाग ने गर्भवती महिलाओं और सड़क मार्ग से कटे क्षेत्रों के लिए अतिरिक्त डोलियां भेजने के निर्देश दिए हैं। हालांकि डोलियों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए केंद्र से मदद मांगी गई है। इसके अलावा 108 एंबुलेंस को ऐसे क्षेत्रों में तैनात रहने के आदेश दिये हैं जहां से अस्पताल सबसे निकट है।