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...ये कोतवाली है या कबाड़खाना

Nainital Updated Mon, 23 Jul 2012 12:00 PM IST
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हल्द्वानी। नाम कोतवाली लेकिन परिसर कबाड़खाने से कम नहीं। मोटर व्हीकल एक्ट के अलावा आपराधिक मामलों में सीज की गई गाड़ियों की पिछले 15 साल से नीलामी नहीं होने के कारण कोतवाली परिसर कबाड़खाने में तब्दील हो गया है। ऐसी ही स्थिति कोतवाली के अधीन चौकियों की भी है। वाहनों की नीलामी भी किसी सिरदर्द से कम नहीं। इसीलिए पुलिस ने हाथ खड़े कर रखे हैं और कोतवाली-चौकियों में वाहन प्रदर्शनी के लिए छोड़े गए हैं।
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कोतवाली और सभी आठ चौकियों में मिलाकर इस समय करीब 350 सीज गाड़ियां हैं। इनमें 95 फीसदी दुपहिया वाहन हैं और इनमें से 70 फीसदी वाहन कबाड़ बन गए हैं। जिनकी कंडीशन ठीक है, उन्हें भी धीरे-धीरे जंक लग रहा है। सीज गाड़ियों को रिलीज करवाने के लिए कोर्ट का चक्कर लगाना पड़ता है। एमवी एक्ट में सीज वाहन तो वाहन स्वामी रिलीज करा लेते हैं लेकिन आपराधिक मामलों में बरामद गाड़ियों को रिलीज कराना टेड़ी खीर है। अधिकांश वाहनों को चोरी, एक्सीडेंल केस, डकैती या फिर अन्य आपराधिक घटनाओं में बरामद करने के बाद सीज किया गया है।
कोतवाली में मुख्य परिसर के ठीक पीछे का हिस्सा शायद सीज गाड़ियों को रखने के लिए ही बना है। वहां गाड़ियों की हालत देख लगता है कि यह किसी कबाड़ी की दुकान होगी। परिसर के आगे भी बाइकों को रखा गया है। गाड़ियों की नीलामी के लिए अदालत से परमिशन लेनी पड़ती है। उसके बाद ही सार्वजनिक रूप से परिवहन विभाग की मौजूदगी में इनकी बोली लगती है। इस लंबे फेर से बचते हुए पुलिस ने 15 वर्षों से अपने ही आफिस परिसर को कबाड़खाना बना रखा है।
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