हल्द्वानी। रानीबाग का रेसक्यू सेंटर बन कर तैयार है, लेकिन उसमें वन्यजीवों का इलाज आदि शुरू नहीं हो सका है। महीनों के इंतजार के बाद जंगलात की नींद टूटी है, वह रेसक्यू सेंटर को शुरू करने जा रहा है। इसी के तहत नैनीताल चिड़ियाघर से गागर(भीमताल) में पकड़ा गया तेंदुआ लाया जाएगा।
पूरे कुमाऊं में वन्यजीवों के इलाज की कोई व्यवस्था नहीं है। कोई भी वन्यजीव बीमार या घायल होने पर उसको रेसक्यू कर नैनीताल चिड़ियाघर लाकर छोड़ दिया जाता है। ऐसे में चिड़ियाघर में क्षमता से ज्यादा वन्यजीव पहुंच गये हैं। इसको देखते हुए जंगलात ने रानीबाग में रेसक्यू सेंटर बनाया था, जहां पर्वतीय और तराई दोनों जगह से वन्यजीवों को सुगमता पूर्वक लाकर इलाज शुरू किया जा सके। इसके लिए रेसक्यू सेंटर की खास तरह से डिजाइन करने के साथ बाड़ा भी बनाया गया। पर करीब नौ महीने से तैयार होने के बाद भी सेंटर में वन्यजीवों का इलाज शुरू नहीं हो सका। अब जंगलात ने रेसक्यू सेंटर को शुरू करने की योजना को अंतिम रूप दिया है। इसी के तहत जनवरी में गागर से रेसक्यू कर लाये गये तेंदुआ को रानीबाग के सेंटर में लाया जाएगा। प्रभागीय वनाधिकारी व चिड़ियाघर निदेशक डा. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि 25 अगस्त तक सेंटर शुरू हो जाएगा। इसके लिए सभी तैयारी कर ली गई है।