हल्द्वानी। महंगाई की मार अब गरीब बच्चों के मिड-डे-मील पर पड़ी है। सर्वशिक्षा अभियान के तहत सरकारी स्कूलों में कक्षा एक से लेकर आठ तक के बच्चों को मिड-डे-मील (मध्याह्न भोजन) दिया जाता है। प्राइमरी स्कूल को प्रति बच्चा 3.10 रुपये और जूनियर हाईस्कूलोें को प्रति बच्चा 4.65 रुपये प्रतिदिन मिलते हैं। इस पैसे से मध्याह्न भोजन के लिए दाल, सब्जी, मसाले और गैस की भी व्यवस्था करनी होती है। सरकार की ओर से चावल मुफ्त मिलता है।
बृहस्पतिवार को नगर पालिका इंटर कालेज (बालक) के कर्मचारी मिड-डे-मील के लिए गैस सिलेंडर लेने इंडेन गैस एजेंसी पहुंचे तो उन्हें घरेलू रेट पर सिलेंडर देने से इंकार कर दिया गया। पहले उन्हें सिलेंडर की कीमत 1158 रुपये बताई, जब वह इस राशि का चेक काटकर सिलेंडर लेने पुन: एजेंसी गए तो वहां इस राशि को बढ़ाकर 1172 कर दिया गया जिसके कारण कर्मचारी को 15 रुपये अपनी जेब से भरने पड़े। पालिका कन्या इंटर कालेज को भी कॉमर्शियल रेट में ही गैस सिलेंडर लेना पड़ा। सरकारी स्कूलों के प्रधानाध्यापिकाओं का कहना है कि सिलेंडर महंगा होने से बच्चों को मिलने वाला मिड-डे-मील भी प्रभावित होगा। उन्होंने बताया कि प्रति माह कम से कम चार सिलेंडर खर्च होते हैं तथा कॉमर्शियल रेट में सिलेंडर लेने पर उन्हें साढ़े चार हजार रुपये गैस में खर्च करने पड़ेंगे और इसके लिए बच्चों के खाने में कटौती करनी होगी।