हल्द्वानी। फोन टावरों के निर्माण के लिए प्रशासन की अनुमति नहीं ली जा रही है। इससे जहां जन स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है वहीं सरकार को राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है। हल्द्वानी और इसके आसपास के इलाकों में करीब डेढ़ सौ सेलुलर, मोबाइल और बेसिक फोन के टावर लगे हैं, यह सभी नियत प्राधिकारी विनियमित क्षेत्र की अनुमति के बगैर चल रहे हैं। आरटीआई के तहत मांगी गई सूचना में इस बात का खुलासा हुआ है।
आरटीआई कार्यकर्ता गुरविंदर सिंह चड्ढा की ओर से मांगी गई सूचना में नियत प्राधिकारी विनियमित क्षेत्र ने बताया है कि उनके कार्यालय से मोबाइल टावरों की स्थापना के लिए कोई अनुमति जारी नहीं की गई है। एक मोबाइल टावर की स्थापना के विरुद्ध आरबीओ एक्ट की धारा 10 के अंतर्गत वाद नियत प्राधिकारी के न्यायालय में चल रहा है। शहर में रिहायशी कालोनियों में भवनों की छतों पर टावर स्थापित किए गए हैं, प्रशासन ने न तो इनकी अनुमति दी है और न ही अब इन्हें हटाने की कोई कार्रवाई की जा रही है। नियमों की बात करें तो सेलुलर, मोबाइल और बेसिक टेलीफोन के टावर के निर्माण की अनुमति सामान्यत: पार्क, बंजर, अविकसित एवं खुले स्थल, कृषि भू उपयोग आदि के अंतर्गत दी जाती है जबकि अन्य भू उपयोगों में सक्षम प्राधिकारी/विकास प्राधिकरण बोर्ड विशेष परिस्थितियों में अनुमति देता है। यहां इसका भी पालन नहीं हुआ है।
नियम के मुताबिक उन्हीं भवनों में टावर स्थापित किए जा सकते हैं जिनके मानचित्र सक्षम प्राधिकारी/प्राधिकरण से स्वीकृत हों और भवन निर्माण का अधिभाग प्रमाणपत्र प्राधिकरण से प्राप्त कर लिया गया हो। प्राकृतिक आपदा की स्थिति में संभावित खतरे से बचने केलिए संकरी गलियों में टावर का निर्माण नहीं किया जा सकता है। पहुंच मार्ग की न्यूनतम चौड़ाई 9 मीटर होनी आवश्यक है। यदि टावर भवन की छत पर लग रहा है तो टावर का निचला हिस्सा छत से न्यूनतम तीन मीटर ऊपर होना चाहिए। टावर के जेनरेटर के लिए प्रदूषण नियंत्रण विभाग की एनओसी अनिवार्य है।
तय मानक से ज्यादा न हो रेडिएशन
हल्द्वानी। मोबाइल टावरों से निकलने वाला रेडिएशन तय मानक से ज्यादा नहीं होना चाहिए। इसके लिए दूरसंचार विभाग ने संचार कंपनियों को कड़े निर्देश दिए हैं। दरअसल बेहतर सिग्नल की होड़ में संचार कंपनियां अपने टावरों की फ्रिक्वेंसी नियमों को ताक पर रखकर बढ़ा देती हैं जिससे रेडिएशन भी अधिक बढ़ रहा है। खासकर टूजी और थ्री जी सेवाओं के लिए एक-एक टावर से कंपनियां दो-दो किमी. तक सेवाएं दे रही हैं।
सेहत के लिए खतरनाक
डाक्टरों के मुताबिक टावरों का रेडिएशन तय मानक से ज्यादा होने पर याददाश्त में कमी, उदासी, चिड़चिड़ापन, गुस्सा, घबराहट, सिर दर्द के साथ ही दिल की धड़कन भी बढ़ जाती है। ब्रेन ट्यूमर और कैंसर जैसी बीमारियों का भी खतरा बना रहता है।