हल्द्वानी। हल्द्वानी वन प्रभाग के डीएफओ की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठने और जांच के बाद रिपोर्ट वन संरक्षक पश्चिम वृत्त की ओर से प्रमुख वन संरक्षक को भेजे जाने के बाद डीएफओ पर तलवार लटक गई है। पीसीसीएफ ने माना है कि हालात बेहतर नहीं है। जरूरत पड़ने पर डीएफओ को हटाने का भी फैसला लिया जा सकता है।
हल्द्वानी डिवीजन वन्यजीव से भरपूर है। इसे देखते हुए केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के निर्देश पर राज्य सरकार ने पिछले साल ही प्रभाग में नंधौर अभ्यारण्य घोषित किया। लेकिन, प्रभाग में सब कुछ ठीक नहीं है। 19 फरवरी को जौलासाल रेंज में वन कर्मियों और शिकारियों के बीच फायरिंग हुई, लेकिन डीएफओ डीटीजे संबंदम ने घटना से ही इंकार कर दिया। बाद में जंगलात ने ही चोरगलिया थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई और पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। बाद में डीएफओ अवकाश पर चले गए। डीएफओ की कार्यप्रणाली को लेकर मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं को डीएफओ को चेतावनी पत्र भी देना पड़ा, इसके बाद भी हालात में सुधार नहीं हुआ है, विभागीय अधिकारियों के अनुसार डीएफओ सीएफ को एक पत्र देकर अवकाश पर चले गए थे। वह अवकाश से कब लौटेंगे? प्रभाग का चार्ज किसको दिया जाए? यह पता उच्चाधिकारियों को ही नहीं था। प्रभागीय वनाधिकारी की कथित लापरवाही को लेकर वन संरक्षक ने पीसीसीएफ डा. आरबीएस रावत को पत्र भेजा है। इस बाबत डा. रावत का कहना है कि सीएफ की रिपोर्ट मिली है। मामले में पूर्व में भी शिकायत आई थी। इस संबंध में आवश्यक कदम उठाये जा रहे हैं। जरूरत पड़ने पर शासन को डीएफओ को हटाने को भी कहा जाएगा।