हल्द्वानी। तराई पश्चिम वन प्रभाग में 18 अप्रैल को मारी गई बाघिन के शिकारी को ढूंढे बिना डीएफओ पदोन्नत होकर वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (डब्लूसीसीबी) का चार्ज संभालने की तैयारी कर ली है। ऐसे में अब बाघिन के शिकारी तलाशना प्रभाग और अधिकारी के लिए नाक का सवाल बन गया है।
दस दिन पहले शिकारियों ने तड़पा कर बाघिन को मार गिराया था, पर अभी तक शिकारी हत्थे नहीं चढ़ सके हैं। इस प्रभाग के डीएफओ निशांत वर्मा कुछ समय पहले ही पदोन्नत होकर वन संरक्षक बने हैं। जल्द ही वह डेपुटेशन पर केंद्र में जाने वाले हैं। वह डब्लूसीसीबी में उप निदेशक के पद पर तैनात होंगे। डब्लूसीसीबी पूरे देश में बाघ समेत दूसरे वन्यजीवों के शिकारी, तस्करों को पकड़ने/सहयोग और मामले की जांच करती है। माना जाता है कि डब्लूसीसीबी में धाकड़, तेज और शिकारियों के बारे में जानकार अधिकारियों की तैनाती होती है। ऐसे में पश्चिम वन प्रभाग के सामने बाघिन के शिकारी तलाश करना चुनौती बन गया है। हालांकि अधिकारी हर बार की तरह जल्द शिकारी पकड़े जाने का दावा ही कर रहे हैं।
यहां भी हाल खराब
हल्द्वानी। केंद्रीय मंत्रालय के हाल भी बहुत बेहतर नहीं है। केंद्र की टाइगर नेट वेबसाइट पर पूरे देश में बाघों की मौत, कारण आदि का विवरण प्रदर्शित किया जाता है, पर इस मामले में टाइगर नेट पीछे है। 18 अप्रैल को तराई पश्चिम में मारे गई बाघिन का विवरण तक दर्ज नहीं किया गया। इसके अलावा इसी प्रभाग में पिछले साल बन्नाखेड़ा में मारे बाघिन के केस के संबंध में अपूर्ण जानकारी दी गई थी। मामला पता चलने के बाद सीएफ समीर सिन्हा ने संपर्क कर सुधार करने को एनटीसीए में बात की।