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इस बार रात में राखी, बांधने को मिलेंगे सवा घंटे

Nainital Updated Fri, 19 Jul 2013 05:32 AM IST
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हल्द्वानी। बहन-भाई के प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन का पर्व इस बार रात में पड़ेगा। श्रावणी पूर्णिमा के मुहूर्त को ही रक्षासूत्र बांधने के लिए शुभ माना गया है, लेकिन शास्त्रों में रात में राखी बांधना शुभ नहीं माना गया है और ऐसे में सूर्योदय के बाद मिलने वाले सवा घंटे के भीतर श्रावणी उपाकर्म (जनेऊ धारण) के साथ-साथ राखी बांधनी पड़ेगी। वर्ष 2000 के बाद 13 साल में फिर चतुर्दशी और श्रावणी पूर्णिमा का योग साथ-साथ पड़ने से त्योहार में इस तरह की विसंगति पैदा हुई है। कुमाऊं में यजुर्वेद और सामवेद के आधार बने पंचांगों के तहत ही सारे त्योहार मनाए जाते हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि सामवेद का पंचांग सिर्फ तिवारी समुदाय मानता है। इसलिए उनकी राखी यजुर्वेद के पंचांग के बाद होगी।
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रक्षाबंधन की कलेंडर की तारीख 20 अगस्त की है और पंचांग के आधार पर भी 20 अगस्त को ही रक्षाबंधन पड़ रहा है, लेकिन उस 20 की रात 8.48 बजे तक चतुर्दशी है और इसके बाद श्रावणी पूर्णिमा शुरू हो रही है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार शास्त्रों में लिखा गया है कि कोई भी शुभ कार्य श्रावणी पूर्णिमा उदयव्यापिनी यानि सूर्य के उदय होने के बाद ही हो सकता है। वह भी तब तक जब तक श्रावणी पूर्णिमा का मुहूर्त है। इस साल पूरे 13 वर्ष बाद चतुर्दशी और श्रावणी पूर्णिमा का योग एकसाथ बनने से रक्षाबंधन त्यौहार के पास रात का प्रहर आ गया है।
चतुर्दशी के दिन दो बार भद्रा पड़ रहा है। ज्योतिष मानते हैं कि हालांकि भद्रा से किसी भी तरह का नुकसान नहीं है। उस दिन व्रत लिया जा सकता है। आचार्य डा. नवीन चंद्र जोशी कहते हैं कि यजुर्वेद के आधार पर बने पंचांग में श्रावणी पूर्णिमा 20 अगस्त की रात 8.48 बजे से शुरू होगी तो उसी समय से रक्षाबंधन का पर्व भी शुरू होगा। रात में श्रावणी उपाकर्म और राखी बांधने का जिक्र शास्त्रों में नहीं है। इसीलिए इसे अशुभ माना गया है। पंचांग के आधार पर 20 अगस्त के बजाए जनेऊ 21 अगस्त की सुबह धारण किया जाएगा और उसी के बाद राखी बांधी जाएगी। उन्होंने बताया कि 21 अगस्त को श्रावणी पूर्णिमा सुबह सूर्योदय के बाद महज एक घंटा 20 मिनट तक ही होगी और शुभ मुहूर्त में हर किसी को जनेऊ धारण कर रक्षासूत्र बांधना होगा। उसके बाद शुभ मुहूर्त नहीं है। ऐसी स्थित कभीकभार आती है। इसके बाद 2022 में ऐसा योग बन रहा है। धर्मसिंधु, निर्णयसिंधु में भी यह बात पुष्ट होती है।
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